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#poems #feeling ##️⃣DilShayarana💘 #poetry #🥰Express Emotion
poems - कोरे कागज़ की दास्तान लिखूँ मैं इस कोरे कागज़ क्या पर, लिखूँ तो किसको लिखूँ॰. लिखना तो सारा जहाँ, ٦١٤٦ लिखूँ तो क्या लिखूँ .. पर लिख दूँ बारिश की पहली बूंदें, या मिट्टी की वो सौंधी खुशबू लिख दूँ चाँद की अधूरी बातें , নাহী ব্ী आरज़ू॰. चुप सी या लिख दूँ माँ के हाथों की रोटी, या बचपन की गलियों का शोर, लिख दूँ दिल में छुपे सपनों को, जो खटखटाते रहते हर ओर. लिख दूँ उस छोटे से आशियाने को, जिसका सपना आँखों में पलता है, फूल, सब्ज़ियाँ, मीठे फल जहाँ, हर मौसम प्यार सा खिलता है. पर हर शब्द ठहर सा जाता है, जब दिल खुद से ये पूछे यूँ इतना कुछ है कहने को फिर भी॰ इस कोरे कागज़ पर आखिर. लिखूँ . क्या कोरे कागज़ की दास्तान लिखूँ मैं इस कोरे कागज़ क्या पर, लिखूँ तो किसको लिखूँ॰. लिखना तो सारा जहाँ, ٦١٤٦ लिखूँ तो क्या लिखूँ .. पर लिख दूँ बारिश की पहली बूंदें, या मिट्टी की वो सौंधी खुशबू लिख दूँ चाँद की अधूरी बातें , নাহী ব্ী आरज़ू॰. चुप सी या लिख दूँ माँ के हाथों की रोटी, या बचपन की गलियों का शोर, लिख दूँ दिल में छुपे सपनों को, जो खटखटाते रहते हर ओर. लिख दूँ उस छोटे से आशियाने को, जिसका सपना आँखों में पलता है, फूल, सब्ज़ियाँ, मीठे फल जहाँ, हर मौसम प्यार सा खिलता है. पर हर शब्द ठहर सा जाता है, जब दिल खुद से ये पूछे यूँ इतना कुछ है कहने को फिर भी॰ इस कोरे कागज़ पर आखिर. लिखूँ . क्या - ShareChat