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तेरी आवाज़ की बारिश के बिना, *दिल का मौसम कभी खिला ही नहीं।* जिसको चाहा था रूह की हद तक, *उसने मुड़कर मुझे देखा ही नहीं।* मैंने हर दर्द हँस के सह तो लिया, *ज़ख्म ऐसा था जो सिला ही नहीं।* लोग कहते रहे भुला उसको, *दिल ने लेकिन कभी सुना ही नहीं।* #Khud m khud ko Dhudhna #Apne Dgabaaz re #😒 अधूरा इश्क़ 💖 #🔱महाकाल के दीवाने #☝अनमोल ज्ञान
Khud m khud ko Dhudhna - हर ठोकर कछ सिरवाने आती है , 41@.. बस गिरकर उठने का हुनर आना 7 0ono 1114449" हर ठोकर कछ सिरवाने आती है , 41@.. बस गिरकर उठने का हुनर आना 7 0ono 1114449" - ShareChat