तेरी आवाज़ की बारिश के बिना,
*दिल का मौसम कभी खिला ही नहीं।*
जिसको चाहा था रूह की हद तक,
*उसने मुड़कर मुझे देखा ही नहीं।*
मैंने हर दर्द हँस के सह तो लिया,
*ज़ख्म ऐसा था जो सिला ही नहीं।*
लोग कहते रहे भुला उसको,
*दिल ने लेकिन कभी सुना ही नहीं।* #Khud m khud ko Dhudhna #Apne Dgabaaz re #😒 अधूरा इश्क़ 💖 #🔱महाकाल के दीवाने #☝अनमोल ज्ञान


