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#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - अब जमाना बदल चुका है १.पंख निकलते ही परिंदें ठिकाना भूल जाते हैं। २.बाप की दौलत ज़्यादा हो तो बच्चे कमाना भूल जाते हैं ३.अब कृष्ण सुदामा वाला दौर नही रहा अब गरीब से लोग रिश्ते बताना भूल जाते हैं ४.अगर पत्नी जरा सा कड़वा बोले तो पति घर आना भूल जाते है। ५.लोग रिश्ते थोक मे बनाते है मगर निभाना भूल जाते है की टांग खींच रहे है মুসই 6 सब एक बस गिरे को उठाना भूल जाते है। ७. गलती से भी किसी से रूठना मत आजकल लोग मनाना भूल जाते है। अब जमाना बदल चुका है १.पंख निकलते ही परिंदें ठिकाना भूल जाते हैं। २.बाप की दौलत ज़्यादा हो तो बच्चे कमाना भूल जाते हैं ३.अब कृष्ण सुदामा वाला दौर नही रहा अब गरीब से लोग रिश्ते बताना भूल जाते हैं ४.अगर पत्नी जरा सा कड़वा बोले तो पति घर आना भूल जाते है। ५.लोग रिश्ते थोक मे बनाते है मगर निभाना भूल जाते है की टांग खींच रहे है মুসই 6 सब एक बस गिरे को उठाना भूल जाते है। ७. गलती से भी किसी से रूठना मत आजकल लोग मनाना भूल जाते है। - ShareChat