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अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 26 पृष्ठ: 64-65 "पुहलो बाई की नसीहत" एक राजा ने पुहलो बाई के ज्ञान-विचार सुने, बहुत प्रभावित हुआ। उस राजा की तीन रानियाँ थी। राजा ने अपनी रानियों को पुहलो बाई के विषय में बताया। राजा ने कई बार पुहलो बाई भक्तिन की अपनी रानियों के सामने प्रशंसा की। अपने पति के मुख से अन्य स्त्री की प्रशंसा सुनकर रानियों को अच्छा नहीं लगा। परंतु कुछ बोल नहीं सकी। उन्होंने भक्तमति पुहलो बाई को देखने की इच्छा व्यक्त की। राजा ने पुहलो बाई को अपने घर पर सत्संग करने के लिए कहा तो पुहलो बाई ने सत्संग की तिथि तथा समय राजा को बता दिया। सत्संग के दिन रानियों ने अति सुंदर तथा कीमती वस्त्र पहने तथा सब आभूषण पहने। अपनी सुंदरता दिखाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। रानियों ने सोचा था कि पुहलो बहुत सुंदर होगी। भक्तमति पुहलो राजा के घर आई। उसने खद्दर का मैला-सा वस्त्र धारण कर रखा था। हाथ में माला थी, चेहरे का रंग भी साफ नहीं था। भक्तमति पुहलो को देखकर तीनों रानियाँ खिल-खिलाकर हँसने लगी और बोली कि यह है वह पुहलो, हमने तो सोचा था कि बहुत सुंदर होगी। उनकी बात सुनकर भक्तमति पुहलो बाई ने कहा किः- वस्त्र-आभूषण तन की शोभा, यह तन काच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडो ।। भावार्थ :- सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से, किस आयु में और कब कष्ट हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी। फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी। इसलिए कहा है 'राण्डो' अर्थात् स्त्रियों भक्ति करो। 'राण्ड' शब्द विधवा के लिए प्रयोग होता है। परंतु सामान्य रीति में स्त्रियाँ अपनी प्रिय सखियों को प्यार से सम्बोधित करने में (प्यारी गाली के साथ) प्रयोग किया करती। अब शिक्षित होने पर यह शब्द प्रयोग नहीं होता। भक्तनति पुहलो बाई ने सत्संग सुनाया। कबीर परमेश्वर जी की साखियों सुनाई :- कबीर, हरि के नाम बिना, नारी कुतिया होय। गली-गली भौंकत फिरे, टूक ना डाले कोय ।। कबीर, राम रटत कोढी भलो, चू-चू पड़े जो चाम। सुंदर देहि किस काम की, जा मुख नाहीं नाम ।। कबीर, नहीं भरोसा देहि का, विनश जाए छिन माहीं। श्वांस उश्वांस में नाम जपो, और यत्न कुछ नाहीं ।। कबीर, श्वांस उश्वांस में नाम जपो, व्यर्था श्वास मत खोओ। ना जाने इस श्वांस का, आवन हो के ना होय ।। गरीब, सर्व सोने की लंका थी, रावण से रणधीरम्। एक पलक में राज्य गया, जम के पड़े जंजीरम् ।। गरीब, मर्द गर्द में मिल गए, रावण से रणधीरम् । कंस, केसि, चाणूर से, हिरणाकुश बलबीरम् ।। गरीब, तेरी क्या बुनियाद है, जीव जन्म घरि लेत। दास गरीब हरि नाम बिन, खाली रह जा खेत ।। * शब्दार्थ :- कबीर परमेश्वर जी ने अध्यात्म का विधान बताया है। कहा है कि जो स्त्री भक्ति नहीं करती, वह अगले जन्म में कुतिया का जीवन प्राप्त करके गली-गली भौंकती फिरती है। कोई उसको भोजन का ग्रास भी नहीं डालता। मानव जीवन में सब भोजन समय पर मिल रहा था। भक्ति न करने से यह दशा होगी। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry ##allpublic
#allpublic - सच्चे भगवान की भक्ति बिना मानव जीवन अधूरा है वस्त्र आभूषण तन की शोभा, यह तन कच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडों।। भावार्थ : सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से॰ किस और आयु में  कब खत्म हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी। फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMDAI Il @SAINIKAMPAIIIM SUPREMEGODORG SAINT KAMPAI JI MAHARAJ सच्चे भगवान की भक्ति बिना मानव जीवन अधूरा है वस्त्र आभूषण तन की शोभा, यह तन कच्चो भाण्डो। भक्ति बिना बनोगी कुतिया, राम भजो न रांडों।। भावार्थ : सुंदर वस्त्र तथा आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं। यह शरीर नाशवान है जैसे कच्चा घड़ा होता है। यह शरीर क्षण भंगुर है। न जाने किस कारण से॰ किस और आयु में  कब खत्म हो जाए। यदि भक्ति नहीं की तो अगले जन्म में कुतिया का जन्म पाओगी। फिर निःवस्त्र भटकती फिरोगी। बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज SPIRITUAL LEADER SANT RAMDAI Il @SAINIKAMPAIIIM SUPREMEGODORG SAINT KAMPAI JI MAHARAJ - ShareChat