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#😒दर्द भरी शायरी🌸 #🥰Express Emotion #📖Whatsapp शायरी #💔मरीज-ए-इश्क❤ #🥰 इमोशनल पल
😒दर्द भरी शायरी🌸 - उसकी आदतें.. मैं बदल न पाई। और इस कोशिश में मैं ख़ुद ` बदलती चली गई। मैंने सोचा था वक़्त उसे सँवार देगा ने तो मुझे ही तोड़ दिया। ٦ ٦؟ उदासी, बेचैनी.. चुप्पी, सब मैंने ही जी ली। काश कभी खुद की तरफ़ भी मुड़ी होती। काश अपने ज़ख्मों का हिसाब लिया होता। पर अब समझ आती है - किसी को बदलना इश्क़ नहीं होता। और खुद को मिटा देना वफ़ा नहीं। TRISHA उसकी आदतें.. मैं बदल न पाई। और इस कोशिश में मैं ख़ुद ` बदलती चली गई। मैंने सोचा था वक़्त उसे सँवार देगा ने तो मुझे ही तोड़ दिया। ٦ ٦؟ उदासी, बेचैनी.. चुप्पी, सब मैंने ही जी ली। काश कभी खुद की तरफ़ भी मुड़ी होती। काश अपने ज़ख्मों का हिसाब लिया होता। पर अब समझ आती है - किसी को बदलना इश्क़ नहीं होता। और खुद को मिटा देना वफ़ा नहीं। TRISHA - ShareChat