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2122 2122 212 ख्वाब पलकों पे बिखरते जा रहे अश्क आँखों में पिघलते जा रहे बढ़ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे खो गया हूँ जुल्फ में तेरी कहीं हद से चाहत में गुजरते जा रहे साँसे साँसों में तेरी यूँ मिल गई रूह में मेरी उतरते जा रहे ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते जा रहे ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 22/3/2017 #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
शायरी - रूह में मेरी उतरते जा रहे पलकों पे बिखरते जा रहे ख्ाब अश्क आँखों से पिघलते जा रहे बढ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे ग 8 ஈகசி खो गया जुल्फ में हद से चाहत में गुजरते जा रहे ज़ साँसों में तेरी यूँ मिल गई सास ल रूह में मेरी उतर्ते रहे जा ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते <8 నగౌ ( লঃসত নানানী रूह में मेरी उतरते जा रहे पलकों पे बिखरते जा रहे ख्ाब अश्क आँखों से पिघलते जा रहे बढ रही बैचेनियाँ दिल की मेरे दर्द दिल ही दिल सुलगते जा रहे लाख हरजाने मुहब्बत के भरे हाथसे फिर भी फिसलते जा रहे ग 8 ஈகசி खो गया जुल्फ में हद से चाहत में गुजरते जा रहे ज़ साँसों में तेरी यूँ मिल गई सास ल रूह में मेरी उतर्ते रहे जा ना ये दिल काबू में ना ही होश है तुझे पाकर हम निखरते <8 నగౌ ( লঃসত নানানী - ShareChat