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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - ८ पहले सच में डर लगता था.॰  कहीं कोई छोड़ न दे... कहीं मैं अकेली न पड जाऊं॰ भूलती जा रही थी॰.. इतना मोह था अपनों का, कि खुद को নীভন্য, हर बार खुद को थोड़ा और बस लोगों को जोड़ने की कोशिश करती रही। ने सिखा दिया है पर अब हालात जो साथ छोड़ना चाहता है, उसे दरवाज़ा दिखाओ , रोकने की वजह मत ढूंढो , क्योंकि जो रुकता है , वो वजह नहीं मांगता | अब इंतज़ार नहीं होता किसी के साथ की उम्मीद का, तो बस देखती हूँ॰ .कौन कितना दिखावा करता है , अब और फिर सीधा जवाब देती हूँ अपनी औकात दिखाओ और दफ़ा हो जाओ! ' अब স_.!!) (शेष अनशीर्षक Puja Nayak ८ पहले सच में डर लगता था.॰  कहीं कोई छोड़ न दे... कहीं मैं अकेली न पड जाऊं॰ भूलती जा रही थी॰.. इतना मोह था अपनों का, कि खुद को নীভন্য, हर बार खुद को थोड़ा और बस लोगों को जोड़ने की कोशिश करती रही। ने सिखा दिया है पर अब हालात जो साथ छोड़ना चाहता है, उसे दरवाज़ा दिखाओ , रोकने की वजह मत ढूंढो , क्योंकि जो रुकता है , वो वजह नहीं मांगता | अब इंतज़ार नहीं होता किसी के साथ की उम्मीद का, तो बस देखती हूँ॰ .कौन कितना दिखावा करता है , अब और फिर सीधा जवाब देती हूँ अपनी औकात दिखाओ और दफ़ा हो जाओ! ' अब স_.!!) (शेष अनशीर्षक Puja Nayak - ShareChat