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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏कर्म क्या है❓ #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का रह जाता कोई अर्थ नहीं | जब फसल सूख कर जल के बिन तिनका - तिनका बन गिर जाये , फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं संबंध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन संबंधों का रह जाता कोई अर्थ नहीं। नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का रह जाता कोई अर्थ नहीं | जब फसल सूख कर जल के बिन तिनका - तिनका बन गिर जाये , फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं संबंध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन संबंधों का रह जाता कोई अर्थ नहीं। - ShareChat