ShareChat
click to see wallet page
search
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - " 9 0 १ राम स्तुति श्री 0 श्री रामचन्द्र कृणालु भजुमनरण भवभय दारुण  9 नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पट कंजारुणं १११  8 कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद " 8 सन्दरं । पटपीत मानहु नडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं I१२I१  भजु दीनवन्धु दिनेश दानवदेत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ११३  0 6 शिर मुकुट कुडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषण * : १ आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित " ೯ಾಾಞಾೆ IIxIl इति वदति तुतसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदत गंजनं ११५  जाहि राच्यो मिलहि सोवर सहज सुन्दर सांवरो । মন करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो न६। 0 एहि भांति गौरी असीस सुन सियसहित हिय हरषित अली।  9 तुलसी भवानिहि  पुनि॰पुनि मुदित मन मन्दिर चली Iloll प्रूजी  9 0 IIHitalll जानी गोरी अनुकूल सियहि य हरषु न जाड कहि  0 मंगल मूल वाम अर्ग फरकन लगे। मजुल 9 0 १ राम स्तुति श्री 0 श्री रामचन्द्र कृणालु भजुमनरण भवभय दारुण  9 नव कंज लोचन कंज मुखकर कंज पट कंजारुणं १११  8 कन्दर्प अगणित अमित छविनव नील नीरद " 8 सन्दरं । पटपीत मानहु नडित रुचि शुचिनोमि जनक सुतावरं I१२I१  भजु दीनवन्धु दिनेश दानवदेत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ११३  0 6 शिर मुकुट कुडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषण * : १ आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित " ೯ಾಾಞಾೆ IIxIl इति वदति तुतसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदत गंजनं ११५  जाहि राच्यो मिलहि सोवर सहज सुन्दर सांवरो । মন करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो न६। 0 एहि भांति गौरी असीस सुन सियसहित हिय हरषित अली।  9 तुलसी भवानिहि  पुनि॰पुनि मुदित मन मन्दिर चली Iloll प्रूजी  9 0 IIHitalll जानी गोरी अनुकूल सियहि य हरषु न जाड कहि  0 मंगल मूल वाम अर्ग फरकन लगे। मजुल - ShareChat