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#📖भगवतगीता🚩
📖भगवतगीता🚩 - "हे पार्थ... ! जो व्यक्ति भीतर से खाली होता है, वही दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करता है। और जो हृदय में छल रखता है, वह संबंधों का नहीं, केवल स्वार्थ का साथी होता है। इसलिए अपने कर्म और सत्य पर अडिग रहो, क्योंकि ক্রী ওনা ননা ট ತ समय हर "हे पार्थ... ! जो व्यक्ति भीतर से खाली होता है, वही दूसरों की सफलता से ईर्ष्या करता है। और जो हृदय में छल रखता है, वह संबंधों का नहीं, केवल स्वार्थ का साथी होता है। इसलिए अपने कर्म और सत्य पर अडिग रहो, क्योंकि ক্রী ওনা ননা ট ತ समय हर - ShareChat