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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - E] S 04 "्यह सत्य है कि संसार को समयनसमय पर आलोचना की जरूरत हुआ करती है यहॉ तक ; कि कठोर ओलोचना की भी; पर वह केवल अल्प कालॅ के लिए ही होती है। हमेशा के लिए तो उन्नतिकारी और रचनात्मक कार्य ही वांछित होते हैं, आलोचनात्मकः याध्वंसात्मक नहीं I" स्वामी विवेकानन्द। * 35 < E] S 04 "्यह सत्य है कि संसार को समयनसमय पर आलोचना की जरूरत हुआ करती है यहॉ तक ; कि कठोर ओलोचना की भी; पर वह केवल अल्प कालॅ के लिए ही होती है। हमेशा के लिए तो उन्नतिकारी और रचनात्मक कार्य ही वांछित होते हैं, आलोचनात्मकः याध्वंसात्मक नहीं I" स्वामी विवेकानन्द। * 35 < - ShareChat