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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - बालमास्कर भालू को समझ आई मेहनत की कीमत चाहो तो पूरा शहद ले छोटी मधुमक्खी आकर बोली , भालू भाई, लो॰ पर हमारा छत्ता मत तोड़ो। हमने इसे बहुत मेहनत से बनाया  [an Stom है। लेकिन मोनू बहुत लालची हो गया था। उसने मधुमक्खी को बात नहीों सुनी। चह गुस्से में बोला, मुझे शहद तो चाहिए ही छत्ता  तोडने में भी मजा आता है। इतना कहकर उसने पंजे से छत्ते ए क जंगल में मोनू नाम का भालू रहता था। उसे शहद बहुत पर जारदार वार कर दिया। बस फिर क्याथाः सारी मधुमक्खयां घूमता और शहद ढंढता गुस्से में बाहर निकल आई। उन्होंने मोनू को चारों तरफ से घेर पसंद था। वह दिनभर जंगल मैं छोटी मधुमक्ख़ी की बात मान लेताः तो मुझे इतना दर्द नहीं मोनू दर्द से रहता। एकदिन उस एक पेड़ पर मधुमन्खर्या का छत्ता दिखा। लिया ओर डंक मारने लगों। आह | ओह ! बचाओ होता| उस दिन के बाद मोनूने कभी किसी को परेशान नहों छत्ते से शहद् की खुशबू आ रही थी। मोनू की आंखें चमक उठी।  चिल्लाने लगा। बह जंगल में इधर उधर भागने लगा। किया और सबकी मेहनत की इज्जत करना सीख लिया।  उसने सोचा, वाह| आज तो मजेदार दावत मिलेगी। लेकिन  = ऑफदस्टोरी  दूसरोंकी मेहनत और बातों ळा सम्मान काखा ओरल 46 = आखिरकार काफी गया। নান छत्ते के आसपास बहुत सारी मधुमक्खिया उड् रही थी। एक मधुमक्खिया चली गई। मोनू बहृत दुखी था। उसने सोचा, अगर चाहिए। किसी को अपने आकार से छोटा या बड़ा नहीं आंकना चहिए।  बालमास्कर भालू को समझ आई मेहनत की कीमत चाहो तो पूरा शहद ले छोटी मधुमक्खी आकर बोली , भालू भाई, लो॰ पर हमारा छत्ता मत तोड़ो। हमने इसे बहुत मेहनत से बनाया  [an Stom है। लेकिन मोनू बहुत लालची हो गया था। उसने मधुमक्खी को बात नहीों सुनी। चह गुस्से में बोला, मुझे शहद तो चाहिए ही छत्ता  तोडने में भी मजा आता है। इतना कहकर उसने पंजे से छत्ते ए क जंगल में मोनू नाम का भालू रहता था। उसे शहद बहुत पर जारदार वार कर दिया। बस फिर क्याथाः सारी मधुमक्खयां घूमता और शहद ढंढता गुस्से में बाहर निकल आई। उन्होंने मोनू को चारों तरफ से घेर पसंद था। वह दिनभर जंगल मैं छोटी मधुमक्ख़ी की बात मान लेताः तो मुझे इतना दर्द नहीं मोनू दर्द से रहता। एकदिन उस एक पेड़ पर मधुमन्खर्या का छत्ता दिखा। लिया ओर डंक मारने लगों। आह | ओह ! बचाओ होता| उस दिन के बाद मोनूने कभी किसी को परेशान नहों छत्ते से शहद् की खुशबू आ रही थी। मोनू की आंखें चमक उठी।  चिल्लाने लगा। बह जंगल में इधर उधर भागने लगा। किया और सबकी मेहनत की इज्जत करना सीख लिया।  उसने सोचा, वाह| आज तो मजेदार दावत मिलेगी। लेकिन  = ऑफदस्टोरी  दूसरोंकी मेहनत और बातों ळा सम्मान काखा ओरल 46 = आखिरकार काफी गया। নান छत्ते के आसपास बहुत सारी मधुमक्खिया उड् रही थी। एक मधुमक्खिया चली गई। मोनू बहृत दुखी था। उसने सोचा, अगर चाहिए। किसी को अपने आकार से छोटा या बड़ा नहीं आंकना चहिए। - ShareChat