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##SantRampalJiMaharaj #TrueSpirituality #VedicKnowledge #RealGod #TrueDevotion #SpiritualAwakening
#SantRampalJiMaharaj #TrueSpirituality #VedicKnowledge #RealGod #TrueDevotion #SpiritualAwakening - अहंकार लोभ मोह क्रोध काम जीवित मरना असंख जन्म तोहे मरतां होगे , जीवित क्यों न मरै रे। द्वादश मध्य महल मठ बोरे, बहुर न देह धरै रे ।। { चुका है। सत्य साघना कर तया जीवित मर। सरलार्थ हे मानवा तू अनन्त बार जन्म और मर जीवित मरने का तात्पर्य हे कि भक्त को ज्ञान होजाता है कि इस संसार की प्रत्येक वस्तु अस्थाई है। यह शरीर भी स्थाई नहीं है। जन्म मृत्यु का बखेड भी भयंकर है। इस संसार में दुःख के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मानव शरीर प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त नहीं किया तो पशु जैसा जीवन जीया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SadokA-hamshamiup SatloShamup V agatGumRampalll.org अहंकार लोभ मोह क्रोध काम जीवित मरना असंख जन्म तोहे मरतां होगे , जीवित क्यों न मरै रे। द्वादश मध्य महल मठ बोरे, बहुर न देह धरै रे ।। { चुका है। सत्य साघना कर तया जीवित मर। सरलार्थ हे मानवा तू अनन्त बार जन्म और मर जीवित मरने का तात्पर्य हे कि भक्त को ज्ञान होजाता है कि इस संसार की प्रत्येक वस्तु अस्थाई है। यह शरीर भी स्थाई नहीं है। जन्म मृत्यु का बखेड भी भयंकर है। इस संसार में दुःख के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मानव शरीर प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त नहीं किया तो पशु जैसा जीवन जीया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SadokA-hamshamiup SatloShamup V agatGumRampalll.org - ShareChat