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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - जिसके सम्मोहन में  पागल धरती   है,  ೯ आकाश गल्प भी है, इतिहास भी है एक पहेली-सी से दुनिया, মিনন  $ सोपान चाँद- सितारे ರ आए चढ़कर छू लेकिन में  माटी की  बू-बास মন   কী   সঃযাS # & आख़िर  किस साँचे में ढालोगे मानव-मन के द्वंद्व को ओशो ' # महारास  की কা মনাম মী ঔ पृष्ठभूमि 3মূন   কী   বুঁ৫ ৪মন   সুঁ৮   কয   লিমা बरसी থী तब से ज़हर पी रहे और इसका एहसास भी है ख़ुशी आज तक आए हैं उस  बस्ती इंद्रधनुष के पुल से गुज़रकर जहाँ  भूख की॰  धूप सलोनी   चंचल है बिंदास भी   है में कंक्रीट   के खिले ग्रंथ   नहीं इस   जंगल फूल पर घाटी   में यूँ कहने को   मधुमास भी की 8 स्मृतियों जिसके सम्मोहन में  पागल धरती   है,  ೯ आकाश गल्प भी है, इतिहास भी है एक पहेली-सी से दुनिया, মিনন  $ सोपान चाँद- सितारे ರ आए चढ़कर छू लेकिन में  माटी की  बू-बास মন   কী   সঃযাS # & आख़िर  किस साँचे में ढालोगे मानव-मन के द्वंद्व को ओशो ' # महारास  की কা মনাম মী ঔ पृष्ठभूमि 3মূন   কী   বুঁ৫ ৪মন   সুঁ৮   কয   লিমা बरसी থী तब से ज़हर पी रहे और इसका एहसास भी है ख़ुशी आज तक आए हैं उस  बस्ती इंद्रधनुष के पुल से गुज़रकर जहाँ  भूख की॰  धूप सलोनी   चंचल है बिंदास भी   है में कंक्रीट   के खिले ग्रंथ   नहीं इस   जंगल फूल पर घाटी   में यूँ कहने को   मधुमास भी की 8 स्मृतियों - ShareChat