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#💓 दिल के अल्फ़ाज़
💓 दिल के अल्फ़ाज़ - हँसकर हर एक ज़ख़्म की बात थी। छुपाने इक उम्र दर्द दिल में दबाने की बात थी। झुकना पड़ा हमें ही कि रिश्ता बचा रहे, वरना तो हाथ छोड़ के जाने की बात थी। पत्थर उठा के मार दिया ख़ुद ही हाथ से, शीशे का एक घर तो बचाने की बात थी। हम चुप रहे तो बात की इज़्ज़त बची रही, वरना तो आईना भी दिखाने की बात थी। हँसकर हर एक ज़ख़्म की बात थी। छुपाने इक उम्र दर्द दिल में दबाने की बात थी। झुकना पड़ा हमें ही कि रिश्ता बचा रहे, वरना तो हाथ छोड़ के जाने की बात थी। पत्थर उठा के मार दिया ख़ुद ही हाथ से, शीशे का एक घर तो बचाने की बात थी। हम चुप रहे तो बात की इज़्ज़त बची रही, वरना तो आईना भी दिखाने की बात थी। - ShareChat