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#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - "कुछ गुज़री , कुछ गुजार दी॰! कुछ निखरी, 38 FrR &4 कुछ बिगड़ी , कुछ बिगाड़ दी॰! कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी॰! कुछ इश्क़ में डूबी, [ कुॅछ इश्क़ ने तार दी॰! ச47Iவ ड्ै उतार दी॰! சக दुश्मनों बस... ज़िन्दगी जैसी मिली , ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी॰." "कुछ गुज़री , कुछ गुजार दी॰! कुछ निखरी, 38 FrR &4 कुछ बिगड़ी , कुछ बिगाड़ दी॰! कुछ अपनी रही, कुछ अपनों पर वार दी॰! कुछ इश्क़ में डूबी, [ कुॅछ इश्क़ ने तार दी॰! ச47Iவ ड्ै उतार दी॰! சக दुश्मनों बस... ज़िन्दगी जैसी मिली , ज़िन्दगी वैसी ही गुज़ार दी॰." - ShareChat