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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 इबादत #🕋❀◌‌दीन की बातें دین کی باتیں◌❀🕋 #✍️ईद कोट्स📝💭 #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️
❤️अस्सलामु अलैकुम - हम को बुलाना या रसूलल्लाह ృక कभी तो सब्ज़ गुंबद का उजाला हम भी देखेंगे हमें बुलवाएँगे आक़ा मदीना हम भी देखेंगे धड़क उठेगा ये दिल या धड़कना भूल जाएगा दिल ए बिस्मिल का उस दर पर तमाशा हम भी देखेंगे अदब से हाथ बाँधे उन के रौज़े पर खड़े होंगे ْدَّمَع जालियों का यूँ नज़ारा हम भी देखेंगे सुनहरी दर ए दौलत से लौटाया नहीं जाता कोई ख़ःली 1A वहाँ खैरात का बटना ख़ुदाया हम भी देखेंगे >> बरसती गुंबद ए ख़ज़रा से टकराती हुई बूँदें वहाँ पर शान से बारिश बरसना हम भी देखेंगे a रात दिन अपने इसी उम्मीद पर हम ने गुज़ारे किसी दिन तो जमाल ए रू ए ज़ेबा हम भी देखेंगे a रुख़्सत क़दम मन भर के हैं महस्स करते हैं n a ज्ग के लौट आने का यारा हम भी थेखेंे हम को बुलाना या रसूलल्लाह ృక कभी तो सब्ज़ गुंबद का उजाला हम भी देखेंगे हमें बुलवाएँगे आक़ा मदीना हम भी देखेंगे धड़क उठेगा ये दिल या धड़कना भूल जाएगा दिल ए बिस्मिल का उस दर पर तमाशा हम भी देखेंगे अदब से हाथ बाँधे उन के रौज़े पर खड़े होंगे ْدَّمَع जालियों का यूँ नज़ारा हम भी देखेंगे सुनहरी दर ए दौलत से लौटाया नहीं जाता कोई ख़ःली 1A वहाँ खैरात का बटना ख़ुदाया हम भी देखेंगे >> बरसती गुंबद ए ख़ज़रा से टकराती हुई बूँदें वहाँ पर शान से बारिश बरसना हम भी देखेंगे a रात दिन अपने इसी उम्मीद पर हम ने गुज़ारे किसी दिन तो जमाल ए रू ए ज़ेबा हम भी देखेंगे a रुख़्सत क़दम मन भर के हैं महस्स करते हैं n a ज्ग के लौट आने का यारा हम भी थेखेंे - ShareChat