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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🇮🇳 देशभक्ति #🙏🏻माँ तुझे सलाम #आज जिनकी पुण्यतिथि है
बलिदान दिवस - মনানী ঘসনা प्रतापसिंह बारहठ जन्मः २४ मई १८९३ बलिदानः २४ मई १९१८ प्रताप सिंह बारहठ राजस्थान के शौर्य और बलिदान की जीवंत प्रतीक हैं। उनका जन्म २४ मई हुआ था। वे क्रांतिकारी  १८९३ को जयपुर में केसरीसिंह बारहठ के सुपुत्र थे और बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनके रक्त में थी। वे भारत की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी संगठन "अभिनव भारत" से जुड़े और अंग्रेजों के खिलाफ का रास्ता अपनाया। १९१२ में हथियारबंद সঘণ जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया, तो प्रताप सिंह इस योजना के सह-षड्यंत्रकारी माने गए। उन्हें गिरफ्तार कर कालापानी और फिर बीकानेर जेल भेजा गया। जेल में उन्हें भीषण यातनाएं दी गईं॰ लेकिन उन्होंने अपने साथियों के नाम उजागर नहीं किए। इस अद्रुत निष्ठा और साहस के कारण २४ मई १९१८ को उन्हें जेल में ही शहीद कर दिया गया। प्रताप सिंह बारहठ का बलिदान भारतीय युवाओं के लिए यह संदेश है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए कर्तव्य ही सर्वोपरि होता है। उनके ये शब्द अमर हैं "मैं अपनी मां को चुप कराने के लिए हज़ारों  माताओं को नहीं रुला सकता। "  उनकी जन्म और शहादत की तारीख एक ही दिन - २४ मई - है, जो उन्हें एक विलक्षण बलिदानी बनाती है। মনানী ঘসনা प्रतापसिंह बारहठ जन्मः २४ मई १८९३ बलिदानः २४ मई १९१८ प्रताप सिंह बारहठ राजस्थान के शौर्य और बलिदान की जीवंत प्रतीक हैं। उनका जन्म २४ मई हुआ था। वे क्रांतिकारी  १८९३ को जयपुर में केसरीसिंह बारहठ के सुपुत्र थे और बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनके रक्त में थी। वे भारत की आज़ादी के लिए क्रांतिकारी संगठन "अभिनव भारत" से जुड़े और अंग्रेजों के खिलाफ का रास्ता अपनाया। १९१२ में हथियारबंद সঘণ जब लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका गया, तो प्रताप सिंह इस योजना के सह-षड्यंत्रकारी माने गए। उन्हें गिरफ्तार कर कालापानी और फिर बीकानेर जेल भेजा गया। जेल में उन्हें भीषण यातनाएं दी गईं॰ लेकिन उन्होंने अपने साथियों के नाम उजागर नहीं किए। इस अद्रुत निष्ठा और साहस के कारण २४ मई १९१८ को उन्हें जेल में ही शहीद कर दिया गया। प्रताप सिंह बारहठ का बलिदान भारतीय युवाओं के लिए यह संदेश है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए कर्तव्य ही सर्वोपरि होता है। उनके ये शब्द अमर हैं "मैं अपनी मां को चुप कराने के लिए हज़ारों  माताओं को नहीं रुला सकता। "  उनकी जन्म और शहादत की तारीख एक ही दिन - २४ मई - है, जो उन्हें एक विलक्षण बलिदानी बनाती है। - ShareChat