ShareChat
click to see wallet page
search
#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲इस्लाम की प्यारी बातें
❤️अस्सलामु अलैकुम - सिराते  मुस्तकीम  क़ूर्बानी वाज़िब थी किसी पर और नही की तो क्या करें ? जवाबः अगर कोई शख़्स मालिके निसाब था और उसने क़ुरबानी नहीं की और के दिन गुज़र गए तो वह जानवर क़ूरबानी " उसकी क़ीमत सदक़ा करना वाजिब है, और अगर या बक़रा ईद आगई अब ये सदक़ा भी नहीं किया और दूसरी  चाहता है कि पिछले साल का हिस्सा अब की साल कर ले तो नहीं कर सकता बल्कि जानवर या उसकी क़ीमत  सदक़ा करना ही वाजिब है फतावा हिनदिया जिल्द ०५ सफह २९६/२९७ सिराते  मुस्तकीम  क़ूर्बानी वाज़िब थी किसी पर और नही की तो क्या करें ? जवाबः अगर कोई शख़्स मालिके निसाब था और उसने क़ुरबानी नहीं की और के दिन गुज़र गए तो वह जानवर क़ूरबानी " उसकी क़ीमत सदक़ा करना वाजिब है, और अगर या बक़रा ईद आगई अब ये सदक़ा भी नहीं किया और दूसरी  चाहता है कि पिछले साल का हिस्सा अब की साल कर ले तो नहीं कर सकता बल्कि जानवर या उसकी क़ीमत  सदक़ा करना ही वाजिब है फतावा हिनदिया जिल्द ०५ सफह २९६/२९७ - ShareChat