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#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - परिवार को साथ लेकर चलने की कोशिश करना अच्छी बात है, लेकिन घर के क्लेश, लड़ाई-झगड़ा और मानसिक परेशानी हो रही हो, तों अलग नहीं होती है, रहने में कोई बुराई साथ रहकर रोज़ नफरत और क्लेश बढ़ाने से कहीं बेहतर है कि मर्यादा में रहकर अलग हो जाया जाए जहाँ रोज़ रोज़ की बहस और नकारात्मकता बच्चों के लिए भविष्य को प्रभावित करने लगे , वहाँ शांति के अलग आशियाना चुनना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। परिवार को साथ लेकर चलने की कोशिश करना अच्छी बात है, लेकिन घर के क्लेश, लड़ाई-झगड़ा और मानसिक परेशानी हो रही हो, तों अलग नहीं होती है, रहने में कोई बुराई साथ रहकर रोज़ नफरत और क्लेश बढ़ाने से कहीं बेहतर है कि मर्यादा में रहकर अलग हो जाया जाए जहाँ रोज़ रोज़ की बहस और नकारात्मकता बच्चों के लिए भविष्य को प्रभावित करने लगे , वहाँ शांति के अलग आशियाना चुनना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। - ShareChat