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#ghazal #diary ki shayeri #ghazal
diary ki shayeri - तेरी यादों का  आज भी घर करता है, धुआँ  किसी टूटे हुए ख़्वाब दिल का डर करता है। हमने चुपचाप ही सह ली हैं जुदाई की रातें , ज़िक्र तेरा मगर आँखों को सफ़र करता है। कोई अपना भी नहीं शहर ए॰्मोहब्बत में अब, हर मुसाफ़िर यहाँ चेहरे का हुनर करता है। मैंने चाहा था जिसे रूह की गहराई से, वो ही हर रोज़ मेरे दिल पे असर करता है। अब तो ख़ामोश दरीचों से हवा कहती है, इश्क़ इंसान को धीरे से बिखर करता है। तेरी यादों का  आज भी घर करता है, धुआँ  किसी टूटे हुए ख़्वाब दिल का डर करता है। हमने चुपचाप ही सह ली हैं जुदाई की रातें , ज़िक्र तेरा मगर आँखों को सफ़र करता है। कोई अपना भी नहीं शहर ए॰्मोहब्बत में अब, हर मुसाफ़िर यहाँ चेहरे का हुनर करता है। मैंने चाहा था जिसे रूह की गहराई से, वो ही हर रोज़ मेरे दिल पे असर करता है। अब तो ख़ामोश दरीचों से हवा कहती है, इश्क़ इंसान को धीरे से बिखर करता है। - ShareChat