Himkar prasad singh
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प्रेम की सच्ची यात्रा हमें किसी और तक नहीं, स्वयं तक ले जाती है। जब हम पीड़ा और विरह को स्वीकार कर लेते हैं, तो वही आत्मबोध का मार्ग बन जाते हैं। भीतर का मिलन होते ही दर्द शांति में और विरह कृपा में संबंध को जोड़ना एक कला है,परंतु संबंध को निभाना एक साधना है,साधना निहारने से नही होती , साधना तो एकाग्रचित होकर भक्ति से प्राप्त होती है। 🙏💞🌷💞 *ॐ जय शनि महाराज*🕉 🕉 🕉 🕉 शं शनैश्चराय नमः🙏 जय शनिदेव ,,सुंदर शनिवार, नमस्ते सदा वत्सले, सनातन संस्कृति, हिंदू हिंदुस्तान #🙏🏻शनिदेव भजन
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