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#❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
❤️जीवन की सीख - जिनघर नोबत बाजता , हाता छतसो रागा सो घर भी खाली पडे़ , बैठन लागे काग ।। भावार्थ जिस घर में कभी नौबत ( शाही बाजा ) बजती थी और जहाँ तरह-तरह के राग ( संगीत ) , गुंज़ते अर्थात जहाँ बहुत वैभव,  और रौनक थी, खुशहाली 5743 8 वही घर आज और वहाँ अब कौए बैठने लगे हैं। अर्थ की गहराई यह साखी जीवन की नश्वरता और समय के परिवर्तन को दर्शाती है। धन, वैभव , सुख-सुविधा और प्रसिद्धि हमेशा स्थायी नहीं होते। समय बदलते देर नहीं लगती| जो स्थान कभी खुशियों और संगीत से भरे थे, वे भी एक दिन वीरान हो सकते हैं। संदेश मनुष्य को अपने वैभव और ऐश्वर्य  पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय के साथ सब कुछ बदल सकता है। जिनघर नोबत बाजता , हाता छतसो रागा सो घर भी खाली पडे़ , बैठन लागे काग ।। भावार्थ जिस घर में कभी नौबत ( शाही बाजा ) बजती थी और जहाँ तरह-तरह के राग ( संगीत ) , गुंज़ते अर्थात जहाँ बहुत वैभव,  और रौनक थी, खुशहाली 5743 8 वही घर आज और वहाँ अब कौए बैठने लगे हैं। अर्थ की गहराई यह साखी जीवन की नश्वरता और समय के परिवर्तन को दर्शाती है। धन, वैभव , सुख-सुविधा और प्रसिद्धि हमेशा स्थायी नहीं होते। समय बदलते देर नहीं लगती| जो स्थान कभी खुशियों और संगीत से भरे थे, वे भी एक दिन वीरान हो सकते हैं। संदेश मनुष्य को अपने वैभव और ऐश्वर्य  पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय के साथ सब कुछ बदल सकता है। - ShareChat