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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि मैं पवनपुत्र श्री हनुमान को प्रणाम करता हूँ॰ जो নুলিন बल के धाम हैं, जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत ( सुमेरु। के समान कांतिवान है। जो दुष्टों |दानवरूपी वन) को नष्ट करने के लिए अग्नि के समान हैं और ज्ञानियों में अग्रगण्य (सबसे आगे) हैं। वे समस्त गुणों के भंडार हैं और श्री राम के सबसे प्रिय भक्त हैं। यह दोहा हमें सिखाता है कि अपार शक्ति होने के बावजूद हनुमान जी में अहंकार नहीं, बल्कि ज्ञान और विनम्रता का वास है। हरि शरणं अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि मैं पवनपुत्र श्री हनुमान को प्रणाम करता हूँ॰ जो নুলিন बल के धाम हैं, जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत ( सुमेरु। के समान कांतिवान है। जो दुष्टों |दानवरूपी वन) को नष्ट करने के लिए अग्नि के समान हैं और ज्ञानियों में अग्रगण्य (सबसे आगे) हैं। वे समस्त गुणों के भंडार हैं और श्री राम के सबसे प्रिय भक्त हैं। यह दोहा हमें सिखाता है कि अपार शक्ति होने के बावजूद हनुमान जी में अहंकार नहीं, बल्कि ज्ञान और विनम्रता का वास है। - ShareChat