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#🙏सुविचार📿
🙏सुविचार📿 - गीता उपदेश हे पार्थ.. ! भाग्य की रेखाएँ हाथों में नहीं , कर्म की दृढ़ता में बसती हैं। जो व्यक्ति परिस्थितियों को दोष देता है, वह स्वयं को कमजोर करता है; और जो उन्हें अवसर मानकर आगे बढ़ता है॰ वही अपना भविष्य स्वयं रचता है। इसलिए संशय छोड़ो, धैर्य और को अपना सारथी पुरुषार्थ  तुम्हारे चरण बनाओ समय स्वयं चूमेगा | गीता उपदेश हे पार्थ.. ! भाग्य की रेखाएँ हाथों में नहीं , कर्म की दृढ़ता में बसती हैं। जो व्यक्ति परिस्थितियों को दोष देता है, वह स्वयं को कमजोर करता है; और जो उन्हें अवसर मानकर आगे बढ़ता है॰ वही अपना भविष्य स्वयं रचता है। इसलिए संशय छोड़ो, धैर्य और को अपना सारथी पुरुषार्थ  तुम्हारे चरण बनाओ समय स्वयं चूमेगा | - ShareChat