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#🖋ग़ालिब की शायरी #👍स्पेशल शायरी🖋 #🌙रात की शायरी✍ #😞बेवफा शायरी #💞Heart touching शायरी✍️
🖋ग़ालिब की शायरी - সু্গ কা সক্ষয दूरी तो सिर्फ़ जिस्म के दरमियां होती है, मोहब्बत में कहाँ कोई विदा होती है। लोग बिछड़ जाते हैं वक़्त की गर्दिश में, यादें मगर रूह के साथ रवां होती हैं। थामे रहती हैं उँगलियाँ ख़यालों के हाथ, तनहाई में भी धड़कनें कहाँ तन्हा होती हैं। वो पास नहीं तो क्या हुआ,, सच्ची मोहब्बतें तो दिलों में जवां हैं। होती ' সু্গ কা সক্ষয दूरी तो सिर्फ़ जिस्म के दरमियां होती है, मोहब्बत में कहाँ कोई विदा होती है। लोग बिछड़ जाते हैं वक़्त की गर्दिश में, यादें मगर रूह के साथ रवां होती हैं। थामे रहती हैं उँगलियाँ ख़यालों के हाथ, तनहाई में भी धड़कनें कहाँ तन्हा होती हैं। वो पास नहीं तो क्या हुआ,, सच्ची मोहब्बतें तो दिलों में जवां हैं। होती ' - ShareChat