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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #✍️ अनसुनी शायरी #💌शब्द से शायरी✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - & इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है इतनी थी आज इतनी बढ़ गई कल ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है कल इतनी थी आज इतनी बची है X & इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है इतनी थी आज इतनी बढ़ गई कल ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है कल इतनी थी आज इतनी बची है X - ShareChat