Manoj Pandey TV
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https://vedupanishadpath.blogspot.com/2026/07/aadhunik-pita-ka-takniki-paglpan.html #🌷शुभ रविवार #🌞गुड मॉर्निंग☕🌞 🕉️🙏नमस्ते जी 🙏🕉 दिनांक - - २३ जुलाई २०२६ ईस्वी दिन - - गुरुवार 🌓 तिथि-- नवमी ( ०७:०३ तक तत्पश्चात दशमी ) 🪐 नक्षत्र -- विशाखा ( २५:४२ तक तत्पश्चात अनुराधा ) पक्ष - - शुक्ल मास - -आषाढ ऋतु - - वर्षा सूर्य- - दक्षिणायने 🌞 सूर्योदय - - प्रातः ५:३७ पर दिल्ली में 🌞 सूर्यास्त - - सायं १९:१८ पर 🌓 चन्द्रोदय -- १४:२८ पर 🌓 चन्द्रास्त - - ‌२४:४६ पर सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२७ कलयुगाब्द - - ५१२७ विक्रम संवत् - -२०८३ शक संवत् - - १९४८ दयानंदाब्द - २०२ 🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁 🚩‼️ओ३म्‼️🚩 🔥प्रश्न :- कोई ऐसा सरल सा लटका बताइए कि जिसके जप से हम परमात्मा को पा सके। कोई अत्यन्त सरल मन्त्र बता दें जिस का हम जाप किया करें। ========= उत्तर :- पुण्य करना बड़ा कठिन है। किसी मन्त्र के जप मात्र से अथवा सरल से लटके से कोई ईश्वर भक्त नहीं बन सकता। हाँ ! स्वयं को धोखे में रख सकता है। यदि आप ऊंचा ऊंचा बोल कर किसी मन्त्र का जप करेंगे तो लोग आपको प्रभुभक्त भले ही कहें आपका हृदय स्वयं साक्षी देगा कि आप खुदा की बजाय शैतान को, परमदेव की बजाय दानव को पूजते हैं क्योंकि आपके मन में दूसरों को दुख देना, सत्य से दूर भागना, लोभ, वासना और न जाने क्या क्या पाप भरे पड़े हैं। इनके होते हुए ईश्वर से प्रेम जैसी पवित्र भावना आपके हृदय में आ ही नहीं सकती। दुआ कहना नहीं मुश्किल दुआ करना नहीं आसां। जमाना लफ्ज़ सुनता है, खुदा दिल को परखता है ॥ अर्थात् प्रार्थना (जप) कहना तो कठिन नहीं है और प्रार्थना (आचरण में) करना सरल नहीं है। संसार तो शब्दों को सुनता है और परमात्मा हृदय को जानता है। लोग चाहते हैं गन्दी बातें भी करें। गन्दे विचार भी रखें और गन्दे कर्म भी करें और परमात्मा की उपासना भी हो जाये। जब आप किसी अतिथि को घर पर आमन्त्रित करते हैं तो सर्वप्रथम अपने घर का कूड़ा कचरा हटाते हैं। यदि आप किसी के घर जायें और उसका घर मैले से भरा पड़ा हो तो आप नाक भौं सिकोड़ कर वहाँ से लौट आयेंगे। इसी प्रकार परमात्मा की उपासना के लिए स्वच्छ पवित्र मन चाहिए। आपका हृदय परमात्मा का निवास है इसको गन्दा रखना मस्जिद व मन्दिर को गन्दा रखने से बड़ा पाप है। मन मन्दिर में गाफिला झाडू रोज़ लगाया कर। जिस मन में ईष्या, द्वेष, लोभ, हिंसा, स्वार्थ का कूड़ा कर्कट भरा पड़ा है उसको दूर किये बिना या शुद्ध किये बिना आपको ईश्वर-दर्शन कर सकने का साहस ही कैसे होता है ? धूल वाले स्थूल दर्पण में तो सूर्य के प्रकाश का भी प्रतिबिम्ब नहीं पड़ता। अत: यदि आप प्रभु -भक्ति चाहते हैं तो महर्षि पतञ्जलि के उपदेशों पर विचार करना होगा और धीरे-धीरे उनका अभ्यास करना होगा। जो लोग देवी देवताओं अथवा खुदा के नाम पर पशुओं की बलि देते हैं और निरपराध पशुओं का रक्तपात करते हैं वे हज़ार बार ईश्वर का नाम लें, कोई लाभ नहीं। परमात्मा से प्रेम करने से पूर्व पशुओं से प्रेम करना सीखना चाहिए। जो लड़का अपने भाइयों से लड़ता अथवा उनको दुःख देता है वह अपने पिता को कैसे प्रसन्न कर सकता है ? यह ठीक है कि जिन बातों का हम ने ऊपर उल्लेख किया है, वे अति कठिन हैं परन्तु प्रभु की प्राप्ति भी तो कठिन कार्य है और जिन लोगों की समझ में यह आ जाये कि उस को पाने के लिये कोई सस्ता लटका जादू मन्त्र नहीं है। बिना परिश्रम किये ध्येय धाम पर पहुंचना असम्भव है। परिश्रम से धीरे धीरे लक्ष्य की सिद्धि सम्भव है। यदि बाल्यकाल से अहिंसा का अभ्यास किया जाये अथवा सत्य भाषण सिखाया जाये तो हिंसा व झूठ से घृणा हो सकती है और हमारे मन पवित्र हो सकते हैं। संसार में लाखों मनुष्य ऐसे हैं जो किसी प्राणी को नहीं सताते, न ही अपने भोजन के लिये और न ही परमात्मा की तुष्टि करने के लिये। वे एक जीवन में नहीं तो कई जीवनों में श्रेष्ठ बन जायेंगे परन्तु जिन्होंने मार्ग की कठिनाइयों के डर से चलना ही नहीं सीखा वह निरन्तर गोते खाते रहेंगे और कभी परमात्मा की सच्ची भक्ति के योग्य नहीं हो सकते। 🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁 🕉️🚩 आज का वेद मंत्र 🕉️🚩 🌷ओ३म् कुक्कुटो सि मधुजिह्व इषमूर्जमावद त्वया वयँसड़्घातँ सड़्घातं जैष्म वर्षवृद्धमसि प्रति त्वा वर्षवृद्धं वेत्तु परापूतँ रक्षः परापूता अरातयो पहतँरक्षो वायुर्वो विविनक्तु देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रतिगृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना ।। ( यजुर्वेद १\१६ ) 💐 अर्थ :- इस मन्त्र में श्लेषालंकार है । परमेश्वर सब मनुष्यों को आज्ञा देता है कि यज्ञ का अनुष्ठान, संग्राम में शत्रुओं का पराजय, अच्छे-अच्छे गुणों का ज्ञान, विद्वानों की सेवा, दुष्ट मनुष्य वा दुष्ट दोषों का त्याग तथा सब पदार्थों को अपने ताप से छिन्न-भिन्न करनेवाला अग्नि वा सूर्य और उनका धारण करनेवाला वायु है, ऐसा ज्ञान और ईश्वर की उपासना तथा विद्वानों का समागम करके और सब विद्याओं को प्राप्त होके सबके लिए सब सुखों को उत्पन्न करनेवाली उन्नति सदा करनी चाहिए । 🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀 🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇 ========== 🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ 🕉🚩🙏 (सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮 ओ३म् तत्सत् श्री ब्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- एकशत सप्तविंशति:( १,९६,०८,५३,१२७ ) सृष्ट्यब्दे】【 द्विसहस्रत्र्यशीतितम: ( २०८३) वैक्रमाब्दे 】 【 द्वियधिकद्विशतम् ( २०२) दयानन्दाब्दे, रौद्र -संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने , वर्षा -ऋतौ, आषाढ - मासे, शुक्ल - पक्षे , नवम्यां / दशम्यां - तिथौ, विशाखा - नक्षत्रे, गुरूवासरे , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे, आर्यावर्तान्तर भगते, भारतवर्षे भरतखंडे...प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे 🍁🍀🍁🍀🍁🍀🍁🍀
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