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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
📝कविता / शायरी/ चारोळी - हुस्न में नाज़ था नज़ाकत थी, इश्क़ में एहसास था शराफ़त थी, वो ज़माने भी क्या ज़माने थे प्यार करना भी एक इबादत थी !! Send a gift हुस्न में नाज़ था नज़ाकत थी, इश्क़ में एहसास था शराफ़त थी, वो ज़माने भी क्या ज़माने थे प्यार करना भी एक इबादत थी !! Send a gift - ShareChat