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#कलयुगमेंसतयुगकीशुरुआत_भाग6 श्री कृष्ण जी का भी मोक्ष नहीं हुआ। श्री राम जी का भी नहीं। तो आपका कौन करेगा? जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत — भाग 6, Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Visit Factful Debates YT ⤵️ https://youtu.be/l_6E15odM2Q?si=RdUbI0i4Hy7D40N4 #😇আধ্যাত্মিকতা🙏 #🙏গনেশ🙏
😇আধ্যাত্মিকতা🙏 - कबीर साहेब ऊँ नाहिं सबसे बडा, इसके ऊपर तत् खड़ा। तत् आगे सत् महान, गीता गावे ऐसा ज्ञान Il श्रीमदशगवत गीता अध्याय १७ का श्लोक २३ तत्, सत, इतत, निर्देशः, ब्रह्मणः, त्रिविधः, स्मृतः  ब्राह्मणाः, तेन, वेदताः, च, यज्ञाः, च, विहिताः, पुरा I। 3 तत् H क्षर पुरुष (ब्रह्म) अक्षर पुरुष ( परब्रह्म) परम अक्षर पुरुष (पूर्ण ब्रह्म) जो सबसे परे है॰ पूर्ण है, जो नाशवान संसार में जो अविनाशी है॰ माया से परे है, है, परिवर्तनशील है॰ अनंत है॰ सच्चिदानंद स्वरूप है॰ umcn समस्त ब्रह्मांड का कारण हैः सभी जीवों और सूष्दि में अविनाशी, अनादि और परंतु स्वयं असंग और अचल है। सर्वोच्च परम सत्य | ಖ aH| ऊँ तत् सत् - यही ब्रह्म का त्रिविध निर्देश है, इसी से वेद और यज्ञ आदि की विधि प्राचीन काल में कही गई। voice of saints कबीर साहेब ऊँ नाहिं सबसे बडा, इसके ऊपर तत् खड़ा। तत् आगे सत् महान, गीता गावे ऐसा ज्ञान Il श्रीमदशगवत गीता अध्याय १७ का श्लोक २३ तत्, सत, इतत, निर्देशः, ब्रह्मणः, त्रिविधः, स्मृतः  ब्राह्मणाः, तेन, वेदताः, च, यज्ञाः, च, विहिताः, पुरा I। 3 तत् H क्षर पुरुष (ब्रह्म) अक्षर पुरुष ( परब्रह्म) परम अक्षर पुरुष (पूर्ण ब्रह्म) जो सबसे परे है॰ पूर्ण है, जो नाशवान संसार में जो अविनाशी है॰ माया से परे है, है, परिवर्तनशील है॰ अनंत है॰ सच्चिदानंद स्वरूप है॰ umcn समस्त ब्रह्मांड का कारण हैः सभी जीवों और सूष्दि में अविनाशी, अनादि और परंतु स्वयं असंग और अचल है। सर्वोच्च परम सत्य | ಖ aH| ऊँ तत् सत् - यही ब्रह्म का त्रिविध निर्देश है, इसी से वेद और यज्ञ आदि की विधि प्राचीन काल में कही गई। voice of saints - ShareChat