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#❤️अस्सलामु अलैकुम #❤️जीवन की सीख
❤️अस्सलामु अलैकुम - ज़बरदस्ती धर्म क्या इस्लाम परिवर्तन की इजाज़त देता है? परिवर्तन ) करवाना सख़्त मना है। इस्लाम में किसी का ज़बरदस्ती मज़हब तब्दील (٤ क़ुरआन और सुन्नत की शिक्षा के मुताबिक़, ईमान सरासर दिल का मामला है। किसी पर भी  बुनियादी उसूलों के मुकम्मल तौर पर ख़िलाफ़ है।  दबाव डालकर उसे मुसलमान बनाना इस्लाम के क़ुरआन शरीफ़ः सूरह अल-बक़रह (२:२५६) 'दीन में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है।' यह हुक्म हैः  अल्लाह का साफ कि हक़ आयत वाज़ेह करती है और ग़लत का रास्ता सा़फ़ कर दिया गया है; अब यह इंसान की अपनी पसन्द है कि वह किसे चुने।  हदीस शरीफ़ः सुनन अबी दाऊद (२६८२) ఫర్ెరే इस हदीस का पसे- मंज़र यह है कि अंसार लोग अपने उन बच्चों को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना चाहते थे जो यहूदी या ईसाई माहौल में पले -बढ़े के रसूल  थे। तब कुरआन की यह आयत (२:२५६) नाज़िल हुई और अल्लाह " ಜF उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। (इसे शेख़ अल्बानी ने सहीह क़रार दिया है) अल्लाह ने इंसान को अक़्ल और समझ अता किया है ताकि वह सही रास्ता ख़ुद चुने। ज़बरदस्ती मज़हब तब्दील करवाना न सिर्फ नफ़रत पैदा करता है, बल्कि यह इस्लाम की रूह के भी सख़्त ख़िलाफ़ है सच्चया इस्लाम ज़बरदस्ती धर्म क्या इस्लाम परिवर्तन की इजाज़त देता है? परिवर्तन ) करवाना सख़्त मना है। इस्लाम में किसी का ज़बरदस्ती मज़हब तब्दील (٤ क़ुरआन और सुन्नत की शिक्षा के मुताबिक़, ईमान सरासर दिल का मामला है। किसी पर भी  बुनियादी उसूलों के मुकम्मल तौर पर ख़िलाफ़ है।  दबाव डालकर उसे मुसलमान बनाना इस्लाम के क़ुरआन शरीफ़ः सूरह अल-बक़रह (२:२५६) 'दीन में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है।' यह हुक्म हैः  अल्लाह का साफ कि हक़ आयत वाज़ेह करती है और ग़लत का रास्ता सा़फ़ कर दिया गया है; अब यह इंसान की अपनी पसन्द है कि वह किसे चुने।  हदीस शरीफ़ः सुनन अबी दाऊद (२६८२) ఫర్ెరే इस हदीस का पसे- मंज़र यह है कि अंसार लोग अपने उन बच्चों को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाना चाहते थे जो यहूदी या ईसाई माहौल में पले -बढ़े के रसूल  थे। तब कुरआन की यह आयत (२:२५६) नाज़िल हुई और अल्लाह " ಜF उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। (इसे शेख़ अल्बानी ने सहीह क़रार दिया है) अल्लाह ने इंसान को अक़्ल और समझ अता किया है ताकि वह सही रास्ता ख़ुद चुने। ज़बरदस्ती मज़हब तब्दील करवाना न सिर्फ नफ़रत पैदा करता है, बल्कि यह इस्लाम की रूह के भी सख़्त ख़िलाफ़ है सच्चया इस्लाम - ShareChat