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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सदा अपने को श्रेष्ठ आत्मा समझते हुए हर संकल्प और कर्म श्रेष्ठ करते हो? क्योंकि जैसी स्मृति होती है वैसी स्थिति स्वतः बन जाती है। तो स्मृति रहती है कि हम महान श्रेष्ठ आत्मा हैं। स्मृति को सदा चैक करो कि निरंतर विशेष आत्मा की रहती है या चलते- चलते  எபி 81 साधारण GI अपना आक्यूपेशन कि मैं विश्व में ब्राह्मण चोटी हूँ। सदा अपने मस्तक का तिलक लगा हुआ हो। लौकिक रीति से भी स्मृति पर ब्राह्मण तिलक लगाते हैं, तो यह निशानी अब संगमयुग की है, तो सदा तिलक कायम रहता है? माया मिटाती तो नहीं है। सदा अटेन्शन रहे तो स्मृति का तिलक अमिट और अविनाशी रहेगा। Avyakt Murli 30-01-79 सदा अपने को श्रेष्ठ आत्मा समझते हुए हर संकल्प और कर्म श्रेष्ठ करते हो? क्योंकि जैसी स्मृति होती है वैसी स्थिति स्वतः बन जाती है। तो स्मृति रहती है कि हम महान श्रेष्ठ आत्मा हैं। स्मृति को सदा चैक करो कि निरंतर विशेष आत्मा की रहती है या चलते- चलते  எபி 81 साधारण GI अपना आक्यूपेशन कि मैं विश्व में ब्राह्मण चोटी हूँ। सदा अपने मस्तक का तिलक लगा हुआ हो। लौकिक रीति से भी स्मृति पर ब्राह्मण तिलक लगाते हैं, तो यह निशानी अब संगमयुग की है, तो सदा तिलक कायम रहता है? माया मिटाती तो नहीं है। सदा अटेन्शन रहे तो स्मृति का तिलक अमिट और अविनाशी रहेगा। Avyakt Murli 30-01-79 - ShareChat