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अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 29 पृष्ठ: 68-70 निष्कर्ष : परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि :- मन नेकी कर ले, दो दिन का मेहमान।। टेक ।। मात-पिता तेरा कुटम कबीला, कोए दिन का रल मिल का मेला। अन्त समय उठ चले अकेला, तज माया मण्डान ।।1 कहाँ से आया, कहाँ जाएगा, तन छूटै तब कहाँ समाएगा। आखिर तुझको कौन कहेगा, गुरू बिन आत्म ज्ञान।।2 कौन तुम्हारा सच्चा सांई, झूठी है ये सकल सगाई । चलने से पहले सोच रे भाई, कहाँ करेगा विश्राम । ।3 रहट माल पनघट ज्यों भरिता, आवत जात भरै करै रीता । जुगन- जुगन तू मरता जीता, करवा ले रे कल्याण ।।4 लख-चौरासी की सह त्रासा, ऊँच-नीच घर लेता बासा । कह कबीर सब मिटाऊँ रासा, कर मेरी पहचान । 5 । भावार्थ : परमेश्वर कबीर जी ने अपने मन को सम्बोधित करके हम प्राणियों को सतर्क किया है कि इस संसार में दो दिन का यानि थोड़े समय का मेहमान है। इस थोड़े-से मानव जीवन में आत्म ज्ञान के अभाव से अनेकों पाप इकट्ठे करके अनमोल मानव जीवन नष्ट कर जाता है। धन कमाने की विधि तो संसार के व्यकि बता सकते हैं, परंतु गुरूदेव जी के बिना आत्म ज्ञान यानि जीव कहाँ से आया? मनुष्य जीव का मूल उद्देश्य क्या है? सतगुरू धारण किए बिना यानि दीक्षा लिए बिना जीव का मानव जन्म नष्ट हो जाता है। यह बात गुरू जी के बिना कोई नहीं बताएगा। चाहे पृथ्वी का राजा भी बन जा, परंतु भविष्य में पशु जन्म मिलेगा। जन्म-मरण का चक्र गुरू जी के ज्ञान व दीक्षा मंत्र (नाम) बिना समाप्त नहीं हो सकता। जब तक जन्म-मरण का चक्र समाप्त नहीं होता तो बताया है कि :- यह जीवन हरहट का कुँआ लोई। या गल बन्धा है सब कोई ।। कीड़ी-कुंजर और अवतारा। हरहट डोर बन्धे कई बारा।। भावार्थ :- जैसे रहट के कँए में लोहे की चक्री लगी होती है। उसके ऊपर बाल्टियों की चैन वैल्ड की जाती है। उसको रहट कहा जाता था। पहले बैल या ऊँट से चलाते थे, जैसे कोल्हू बैल-ऊँट से चलाते हैं। (पहले अधिक चलाते थे) रहट की बाल्टियाँ नीचे कँए से पानी भरकर लाती है। ऊपर खाली हो जाती है। यह चक्र सदा चलता रहता है। इसी प्रकार पृथ्वी रूपी कँए से पाप तथा पुण्यों की बाल्टी भरी ऊपर स्वर्ग-नरक में खाली की। इस प्रकार जन्म-मरण के चक्र में जीव सदा रहता है। ऊपर के शब्द में यही समझाया है कि संसार में परिवार-धन सब त्यागकर एक दिन अकेला चला जाएगा। फिर कहीं अन्य स्थान पर जन्म लेकर यही क्रिया करके चला जाएगा। यदि आप घर से किसी अन्य शहर में जाते हैं तो जाने से पहले निश्चित करते हो कि वहाँ जाऐंगे। उसके बाद कहाँ विश्राम करेंगे। परंतु संसार छोड़कर जाते हो तो कभी विचार नहीं करते कि कहाँ विश्राम करोगे। हे जीव! चौरासी लाख प्रकार के प्राणियों के शरीरों में प्रताड़ना सहन करता है। मरता-जीता (नये प्राणी का जीवन प्राप्त करता) है। कभी राजा बनकर उच्च बन जाता है, कभी कंगाल बनकर नीच कहलाता है। परमात्मा कबीर जी समझा रहे हैं कि अवतार गण (राम, कृष्ण आदि-आदि) भी सत्य साधना न मिलने के कारण जन्म-मरण के चक्र में पड़े हैं। सत्य साधना मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। मैं तेरा जन्म-मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry ##allpublic
#allpublic - काल लोक र्में जन्म॰ मरण रूपी हरहट (चक्र) लोई॰ या गल बंध्या है सब कोई। योह हरहट का 353 कीड़ी कुंजर और अवतारा , हरहट डोरी बंधे कई बारा।। भावार्थ हरहट के कुएं की तरह यह संसार भी एक चक्र हेः जिसमे जीव पाप पुण्य के अनुसार जन्म मरण मे घूमता रहता है। मनुष्य सब कुछ छोडकर अकेला जाता हे ओर फिर नया जन्म लेकर वही प्रक्रिया दोहराता हे। जीव ८४ लाख योनियो मे दुख सहता हे ओर कभी ऊँचा तो कभी नीचा जन्म पाता हे। संसार छोडते समय मनुष्य यह नही सोचता कि आगे कहा जाएगा। सत्य साधना मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। तेरा जन्मन्मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। बंदीछोड़ सतगुरु रागपाल जी महाराज SPIRIIUAL LLADER ' SANT KAMPAI JI X @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAIMT RAHHPAL JI MAIARAI . काल लोक र्में जन्म॰ मरण रूपी हरहट (चक्र) लोई॰ या गल बंध्या है सब कोई। योह हरहट का 353 कीड़ी कुंजर और अवतारा , हरहट डोरी बंधे कई बारा।। भावार्थ हरहट के कुएं की तरह यह संसार भी एक चक्र हेः जिसमे जीव पाप पुण्य के अनुसार जन्म मरण मे घूमता रहता है। मनुष्य सब कुछ छोडकर अकेला जाता हे ओर फिर नया जन्म लेकर वही प्रक्रिया दोहराता हे। जीव ८४ लाख योनियो मे दुख सहता हे ओर कभी ऊँचा तो कभी नीचा जन्म पाता हे। संसार छोडते समय मनुष्य यह नही सोचता कि आगे कहा जाएगा। सत्य साधना मेरे पास है। हे प्राणी! तू मेरे को पहचान, मैं समर्थ परमात्मा हूँ। तेरा जन्मन्मरण का सर्व झंझट समाप्त कर दूँगा। बंदीछोड़ सतगुरु रागपाल जी महाराज SPIRIIUAL LLADER ' SANT KAMPAI JI X @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAIMT RAHHPAL JI MAIARAI . - ShareChat