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F .KHAN - Author on ShareChat
F .KHAN
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#Deewani Ala Hazrat ki #jumma mubarak #ala hazrat #मस्लके आला हजरत जिंन्दाबाद

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    F .KHAN
    #Deewani Ala Hazrat ki #eid miladunnabi #कमिंग सून 🇵🇰ईद मिलादुन्नबी 🇸🇦 #मस्लके आला हजरत जिंन्दाबाद
    Deewani Ala Hazrat ki, eid miladunnabi
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  • "ارسلان - Author on ShareChat
    ✨💫"ارسلان✨💫
    #❤️अस्सलामु अलैकुम #Ala Hazrat 🌹 आला हज़रत (R.A) #★🕋[उर्स ए आला हज़रत मुबारक हो]🎉★ #ala Hazrat Ka URS
    अस्सलामु अलैकुम, Ala Hazrat  आला हज़रत (R.A)
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    F .KHAN
    #jumma mubarak #मस्लके आला हजरत जिंन्दाबाद #Deewani Ala Hazrat ki
    jumma mubarak, मस्लके आला हजरत जिंन्दाबाद
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  • islamic quotes - Author on ShareChat
    islamic quotes
    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 32
    हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम Celj HPT का पूरा वाक़िआ 32 مالسلا ہیلع बादशाह के सामने तौहीद की दलील हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की तरफ़ जारी रखा| बुलाना एक बादशाह ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से अल्लाह के बारे में बहस की, क्योंकि उसे अपनी हुकूमत पर बहुत घमंड था। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने फ़रमायाः ४मेरा रब वह है जो ज़िन्दगी देता है और मौत देता है। " %My Lord is the One who gives life and causes death ' बादशाह ने घमंड से कहा कि वह भी ज़िन्दगी और मौत का फ़ैसला कर सकता है तब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने ऐसी दलील दी जिसका वह कोई जवाब न दे सकाः " अल्लाह सूरज को पूरब से निकालता है, तुम उसे पश्विम से निकाल लाओ यह सुनकर वह काफ़िर बादशाह हैरान रह गया और उसके पास कोई जवाब नहीं था। कूरआन में क्या तुम्हारा रब वही है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया? मैंने हाँ कहा। " तो फ़िर तुम मेरे सिवा किन वह कहन लगाः বুতন ৪ী?" चीज़ों को (सूरह अल-्बक़रह २२५८) 3ল Part 33 ম: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की आगे की हिजरत और अल्लाह की राह में उनका नया सफ़र|
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  • ≛⃝ONAM ꯭᪳: YADAV - Author on ShareChat
    𝄟🔥⃟≛⃝🇸ONAM ꯭᪳: YADAV✮⃝🇮🇳
    #deewaniyat #deewaniyat💔 #💕हिंदी रोमांटिक फिल्में🎥 #❤️प्यार वाले स्टेटस ❤️ #🥰Express Emotion
    deewaniyat, deewaniyat
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  • islamic quotes - Author on ShareChat
    islamic quotes
    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 31
    हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम @४l भाग 31 का पूरा वाक़िआ , مالسلا ہیلع दावत ए-्तौहीद जारी और अल्लाह का यक़ीन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत देना जारी रखा। Prophet Ibrahim (AS) continued to invite his people towards the worship of Allah वह हर जगह जाकर लोगों को समझाते कि अल्लाह एक है, उसी की इबादत करो और उससे ही मदद माँगो। He went everywhere and explained to people that Allah is One, worship Him alone and seek help only from Him वह क़हतेः " अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को पैदा किया है, वह हर चीज़ पर क़ादिर है। " He would say: Allah has created the heavens and the earth He is All Powerful over everything हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम दिन और रात अल्लाह की इबादत करते और उसी पर पूरा भरोसा रखते।  Prophet Ibrahim (AS) worshipped Allah day and night and placed complete trust in Him उन्होंने अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और भतीजे हज़रत लूत अलैहिस्सलाम को भी अल्लाह की राह पर बुलाया| He also invited his son Ismail (AS] and his nephew Lut (AS) towards the path of Allah धीरे-धीरे कुछ उनकी दावत ए-्तौहीद का असर लोगों और कुछ  के दिलों पर होने लगा लोग ईमान लाए। The effect of his invitation to Tawheed gradually began to touch some hearts and some people accepted faith कुरआन में और इब्राहीम अपने पिता आज़र और अपनी कौम की तरफ़ इसी लिए लौला कि वह उन्हें अल्लाह के हुकम নংক্ষ বুলাৎ (सूरह जुखवुफ़ ४३:२६) इस वाक़िआ से सीख हमें भी हर हाल में अल्लाह की दावत देनी चाहिए। अल्लाह पर भरोसा रखने वाला ही कामयाब होता है। सब्र और यकीन से बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है। Part 32 #4fa!: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की इम्तिहान की घड़ी और अल्लाह का हुकम | Alah. time of trial of Prophet Ibrahim (AS) and the command of , Te ' Watch Part 32: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम @४l भाग 31 का पूरा वाक़िआ , مالسلا ہیلع दावत ए-्तौहीद जारी और अल्लाह का यक़ीन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत देना जारी रखा। Prophet Ibrahim (AS) continued to invite his people towards the worship of Allah वह हर जगह जाकर लोगों को समझाते कि अल्लाह एक है, उसी की इबादत करो और उससे ही मदद माँगो। He went everywhere and explained to people that Allah is One, worship Him alone and seek help only from Him वह क़हतेः " अल्लाह ने आसमान और ज़मीन को पैदा किया है, वह हर चीज़ पर क़ादिर है। " He would say: Allah has created the heavens and the earth He is All Powerful over everything हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम दिन और रात अल्लाह की इबादत करते और उसी पर पूरा भरोसा रखते।  Prophet Ibrahim (AS) worshipped Allah day and night and placed complete trust in Him उन्होंने अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और भतीजे हज़रत लूत अलैहिस्सलाम को भी अल्लाह की राह पर बुलाया| He also invited his son Ismail (AS] and his nephew Lut (AS) towards the path of Allah धीरे-धीरे कुछ उनकी दावत ए-्तौहीद का असर लोगों और कुछ  के दिलों पर होने लगा लोग ईमान लाए। The effect of his invitation to Tawheed gradually began to touch some hearts and some people accepted faith कुरआन में और इब्राहीम अपने पिता आज़र और अपनी कौम की तरफ़ इसी लिए लौला कि वह उन्हें अल्लाह के हुकम নংক্ষ বুলাৎ (सूरह जुखवुफ़ ४३:२६) इस वाक़िआ से सीख हमें भी हर हाल में अल्लाह की दावत देनी चाहिए। अल्लाह पर भरोसा रखने वाला ही कामयाब होता है। सब्र और यकीन से बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है। Part 32 #4fa!: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की इम्तिहान की घड़ी और अल्लाह का हुकम | Alah. time of trial of Prophet Ibrahim (AS) and the command of , Te ' Watch Part 32:
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    islamic quotes
    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 30
    हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम   (s | भाग का पूरा वाक़िआ 30 مالسلا ہیلع ख़ुदा का ख़लील और उम्मतों के लिए रहमत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के बहुत ही प्यारे नबी थे, जिन्हे " ख़लीलुल्लाह (अल्लाह का ख़लील) कहा गया। Prophet Ibrahim (AS) was very dear to Allah; and was called Khalilullah (the close friend of Allah) . अल्लाह ने उनसे अहद किया और उन्हें हर काम में कामयाबी अता फरमाई Allah made covenant with him and granted him success in every task. वह सच्चे, नेक और सब्र वाले नबी थे। true, righteous and patient Prophet He was उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी अल्लाह की इबादत, तौहीद की दावत और लोगों की हिदायत में गुज़ारी | He spent his entire life in the worship of Allah inviting people to Tawheed and guiding them उनकी दुआओं में उनकी औलाद और उम्मतों की भलाई की दुआऐं शामिल थीं। supplications he always prayed In his for the goodness of his children nations and अल्लाह ने उन्हे दो महान औलाद अता फरमाई , हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्हाक अलैहिस्सलाम | Allah blessed him with two great sons Ismail (AS) and Ishaq (AS) उम्मत को यह सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा , सब्र और तौहीद ही सफलता की 84 कुंजी  His life teaches us that trust in Allah patience Tawheed are the Keys and to true success कुरआन में "और इब्राहीम अलैहिस्सलाम को याद करो उन्होंने अपने रब से कहाः ডান ऐ मेरे रब! मुझे ऐसा जानदार उत्पन्न कर जो नमाज़ क़़ायम करे।  (सूरह इब्राहीम १४:४०) Part ३१ में देखिएः इब्राहीम अलैहिस्सलाम की औलाद, हज़रत हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की मेहनत और काबा की बुलंद दीवारें | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़िन्दगी रहमत , हिदायत ईमान का बेहतरीन नमूना है। 31R सच्चे हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम   (s | भाग का पूरा वाक़िआ 30 مالسلا ہیلع ख़ुदा का ख़लील और उम्मतों के लिए रहमत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के बहुत ही प्यारे नबी थे, जिन्हे " ख़लीलुल्लाह (अल्लाह का ख़लील) कहा गया। Prophet Ibrahim (AS) was very dear to Allah; and was called Khalilullah (the close friend of Allah) . अल्लाह ने उनसे अहद किया और उन्हें हर काम में कामयाबी अता फरमाई Allah made covenant with him and granted him success in every task. वह सच्चे, नेक और सब्र वाले नबी थे। true, righteous and patient Prophet He was उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी अल्लाह की इबादत, तौहीद की दावत और लोगों की हिदायत में गुज़ारी | He spent his entire life in the worship of Allah inviting people to Tawheed and guiding them उनकी दुआओं में उनकी औलाद और उम्मतों की भलाई की दुआऐं शामिल थीं। supplications he always prayed In his for the goodness of his children nations and अल्लाह ने उन्हे दो महान औलाद अता फरमाई , हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और हज़रत इस्हाक अलैहिस्सलाम | Allah blessed him with two great sons Ismail (AS) and Ishaq (AS) उम्मत को यह सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा , सब्र और तौहीद ही सफलता की 84 कुंजी  His life teaches us that trust in Allah patience Tawheed are the Keys and to true success कुरआन में "और इब्राहीम अलैहिस्सलाम को याद करो उन्होंने अपने रब से कहाः ডান ऐ मेरे रब! मुझे ऐसा जानदार उत्पन्न कर जो नमाज़ क़़ायम करे।  (सूरह इब्राहीम १४:४०) Part ३१ में देखिएः इब्राहीम अलैहिस्सलाम की औलाद, हज़रत हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की मेहनत और काबा की बुलंद दीवारें | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़िन्दगी रहमत , हिदायत ईमान का बेहतरीन नमूना है। 31R सच्चे
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    islamic quotes
    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 19
    HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 19
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    islamic quotes
    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 19
    हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम Gel भाग 18 का पूरा वाक़िआ مالسلا ہیلع तौहीद की दावत और सब्र की मिसाल आग के मोज़िज़े के बाद भी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत देना जारी रखा वह हर जगह जाकर लोगों को समझाते , कि अल्लाह ही एक है , उसी ने पैदा किया और वही हमारी रज़्ज़ाक है । लेकिन क़ौम के बड़े लोग उनकी बातों से नाराज़ रहते और लोगों को उनके खिलाफ সভকান ২৪্ন | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को तरह-्तरह की तकलीफ़ें दी गई, लेकिन उन्होंने अल्लाह पर भरोसा और सब्र का दामन नहीं छोड़़ा | की रज़ा के लिए हर मुश्किल वह अल्लाह सहन करते रहे और लोगों को सिर्फ हक़ की दावत देते रहै | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़िन्दगी हमें सिखाती है कि हक की दावत देना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है, चाहे रास्ते में कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों | इस हिस्से से मिलने वाली नसीहत 5 عللا तौहीद की दावत सब्र और हिम्मत हर हाल में अल्लाह लोगों की नाराज़गी अल्लाह पर भरासा हासिल से डरकर हक़ नहीं देना हर नबी का ম ৪ী ৪ক নক रखने वाला कभी रज़। हारता नहीं | उन्दना चाहिए। पर्हुचा जा सकता है छोड़ना चाहिए मक़सद था| अगले हिस्से में देखिएः कुरआन की आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम "और इब्राहीम ने अपने रब का सामान करने वाला की उम्मत का हाल और एक उम्मत बनाया दुआओं का असर। ওনকী (सूरह अन नहल १६:१२०) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम Gel भाग 18 का पूरा वाक़िआ مالسلا ہیلع तौहीद की दावत और सब्र की मिसाल आग के मोज़िज़े के बाद भी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को अल्लाह की इबादत की दावत देना जारी रखा वह हर जगह जाकर लोगों को समझाते , कि अल्लाह ही एक है , उसी ने पैदा किया और वही हमारी रज़्ज़ाक है । लेकिन क़ौम के बड़े लोग उनकी बातों से नाराज़ रहते और लोगों को उनके खिलाफ সভকান ২৪্ন | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को तरह-्तरह की तकलीफ़ें दी गई, लेकिन उन्होंने अल्लाह पर भरोसा और सब्र का दामन नहीं छोड़़ा | की रज़ा के लिए हर मुश्किल वह अल्लाह सहन करते रहे और लोगों को सिर्फ हक़ की दावत देते रहै | हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की ज़िन्दगी हमें सिखाती है कि हक की दावत देना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है, चाहे रास्ते में कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों | इस हिस्से से मिलने वाली नसीहत 5 عللا तौहीद की दावत सब्र और हिम्मत हर हाल में अल्लाह लोगों की नाराज़गी अल्लाह पर भरासा हासिल से डरकर हक़ नहीं देना हर नबी का ম ৪ী ৪ক নক रखने वाला कभी रज़। हारता नहीं | उन्दना चाहिए। पर्हुचा जा सकता है छोड़ना चाहिए मक़सद था| अगले हिस्से में देखिएः कुरआन की आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम "और इब्राहीम ने अपने रब का सामान करने वाला की उम्मत का हाल और एक उम्मत बनाया दुआओं का असर। ওনকী (सूरह अन नहल १६:१२०)
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    #HAZRAT Ibrahim Alehissallam ka waqia part 17
    98|! हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भाग का पूरा वाक़िआ 17 مالسلا هيلع मक्का में आगमन और काबा की बुनियाद हज़रत इब्राहीम अलेहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल अलैहिस्सलाम और बीवी हाजिरा के साथ मक्का पहुंचे ।  बहां पानी और आबादी कम थी॰ लेकिन उन्होंने সলপোচ ক চুবস দয সহামা ক্িয়া उन्होंने अल्लाह के घर (काबा ) की बुनियाद रखी और  इस्माइल अलैहिस्सलाम के साथ उसे बनाया | उन्होंने दुआ कीः " ऐ हमारे रब ! इस शहर को अमन वाला बना और हमें और हमारी औलाद को तेरी इबादत कायम रखने की तौफीक़ दे! (মুংচে ব্রমনাচীস 14:35] और (याद करो) जब इवराहीम और इस्माइल ने कहाः कबूल फ़रमाइए, आप ही सर्वज्ञाता , सर्वघ्नेद हैं ! " "ऐ हमोर रब! आप চসা (सूरह अलन्बक़रा २:१२७) 98|! हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम भाग का पूरा वाक़िआ 17 مالسلا هيلع मक्का में आगमन और काबा की बुनियाद हज़रत इब्राहीम अलेहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल अलैहिस्सलाम और बीवी हाजिरा के साथ मक्का पहुंचे ।  बहां पानी और आबादी कम थी॰ लेकिन उन्होंने সলপোচ ক চুবস দয সহামা ক্িয়া उन्होंने अल्लाह के घर (काबा ) की बुनियाद रखी और  इस्माइल अलैहिस्सलाम के साथ उसे बनाया | उन्होंने दुआ कीः " ऐ हमारे रब ! इस शहर को अमन वाला बना और हमें और हमारी औलाद को तेरी इबादत कायम रखने की तौफीक़ दे! (মুংচে ব্রমনাচীস 14:35] और (याद करो) जब इवराहीम और इस्माइल ने कहाः कबूल फ़रमाइए, आप ही सर्वज्ञाता , सर्वघ्नेद हैं ! " "ऐ हमोर रब! आप চসা (सूरह अलन्बक़रा २:१२७)
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