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#💔 काहानी tute dil ki 💔
💔 काहानी tute dil ki 💔 - शब्दों का प्रतिध्वनि कुदरत खामोश है॰ पर बहरी नहीं, हर शब्द तुम्हारा, वो है कहीं। सुनती तुम जो बीज जुबां से बोते हो, वो ही फल बनकर लौटते हैं यहीं। कहो "मैं कर सकता हूँ" - तो राहें खुलती हैं, कहो "मुझसे नहीं होगा" _ तो दीवारें बनती हैं। स्वर में "तथास्तु" कह देती कुदरत बस तुम्हारे 8, तुम जो चाहो, वही सच्चाई रच देती है। नहीं दोषी, सोच का आईना है, भाग्य हर वाक्य तुम्हारा, विधाता का फ़रमाना है। शब्दों में ऊर्जा है, एहसास की लौ है, वही लौट आना तय है। जो कहा 377 { इसलिए बोलो प्रेम , बोलो उजियारा, बोलो कि ॰सब अच्छा होगा"  और होगा भी మ HRT क्योंकि कुदरत नहीं सच है या झूठ, पूछती " है ~ और कहती है নী নম ி "নথাম" शब्दों का प्रतिध्वनि कुदरत खामोश है॰ पर बहरी नहीं, हर शब्द तुम्हारा, वो है कहीं। सुनती तुम जो बीज जुबां से बोते हो, वो ही फल बनकर लौटते हैं यहीं। कहो "मैं कर सकता हूँ" - तो राहें खुलती हैं, कहो "मुझसे नहीं होगा" _ तो दीवारें बनती हैं। स्वर में "तथास्तु" कह देती कुदरत बस तुम्हारे 8, तुम जो चाहो, वही सच्चाई रच देती है। नहीं दोषी, सोच का आईना है, भाग्य हर वाक्य तुम्हारा, विधाता का फ़रमाना है। शब्दों में ऊर्जा है, एहसास की लौ है, वही लौट आना तय है। जो कहा 377 { इसलिए बोलो प्रेम , बोलो उजियारा, बोलो कि ॰सब अच्छा होगा"  और होगा भी మ HRT क्योंकि कुदरत नहीं सच है या झूठ, पूछती है ~ और कहती है নী নম ி "নথাম" - ShareChat