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क्या प्राचीन वेदों में संत कबीर साहेब को ईश्वर (परमेश्वर) के रूप में दर्शाया गया है? ​इस वीडियो में, ऋग्वेद (मण्डल 9, सूक्त 96) के श्लोकों का हवाला देते हुए यह दावा किया जा रहा है कि वेदों में 'कविर्देव' या 'कबीर' शब्द का उल्लेख है, जो एक संत के रूप में आकर समाज को जागृत करते हैं। वीडियो में आर्ष प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा भाष्य किए गए ऋग्वेद की पुस्तक दिखाकर इन मंत्रों के अनुवाद पर चर्चा की जा रही है। ​क्या यह अनुवाद और व्याख्या पूरी तरह सटीक है? क्या वास्तव में वेदों में कबीर साहेब का नाम आता है या यह सिर्फ शब्दों के अर्थ (जैसे 'कवि' या 'महान') का एक अलग दृष्टिकोण है? ​पूरी जानकारी के लिए वीडियो को अंत तक देखें और अपनी राय कमेंट सेक्शन में ज़रूर साझा करें! ​📌 वीडियो के मुख्य बिंदु: ​ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 96, मन्त्र 16-21 की व्याख्या। ​महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के भाष्य और संत रामपाल जी महाराज के अनुवाद की चर्चा। ​'कविर्गीर्भिः काव्येना कविर्सन्' मन्त्र का विश्लेषण। #महान_ग्रंथो_के_पन्नो_से #परमार्थ_के_लिए_कुर्बान #सच्चा_प्रधानमंत्री #🙏🏻गुरबानी #👍 डर के आगे जीत👌
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