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AnnapurnaMuhim_SantRampalJi #रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान #santrampal mahraj ji
santrampal mahraj ji - करिश्मा  जो उस अण्डारे में हुआ वह जीमनवार ललंगर) तीन दिन तक चला था। दिन र्में प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो बार भोजन खाता था। कुछ तो तीन-्चार बार भी खाते थे क्यौकि प्रत्येक भोजन के पश्चात् दक्षिणा ्में एक मौहर (१0 ग्राम सोना) और एक दौहर (कीमती सूती शाल) दिया जा रहा   या। इस लालच सब दिन में दो-तीन बार भोजन खा रहे ये॰ परंतु ಹRRaT शौच एक बार भी नहीं जा रहे थे, न पेशाब कर रहेये। इतना स्वादिष्ट भोजन या कि पेट भर्भरकर खा रहे ये। पहले से  द्रुगना  भोजन खा रहे थे। हजम भी हो रहा था। किसी रोगी तथा वृद्ध T को कोई परेशानी नहीं हो रही थी। उन सबको मध्य के दिन चिंता हुई कि न तो पेट भारी है, भूख भी ठीक लग रही है, कहीं रोगी काशी न हो जाऐं। सतलोक से आए सेवकों को समस्या बताई तो उन्होने कहा कि यह भोजन ऐसी जड़ी बूटियां डलकर बनाया है जिनसे यह oSI शरीर में ही समा जाएगा हम तो प्रतिदिन यही भोजन अपने लंगर में बनाते हैं॰ यही खाते हैं। हम कभी शौच नहीं जाते तथा न पेशाब करते, आप निश्च्ित रहो। फिर भी विचार कर रहे थे कि खाना खाया है॰ परंतु कुछ तो मल निकलना चाहिए। उनको  लैट्रिन जाने का दबाव हुआ| सब शहर से बाहर चल पडे़े। टट्टी  3/! एकान्त स्थान खोजकर बैठे तो गुदा से वायु निकली। पेट लिए ক हल्का हो गया तथा वायु से सुगंघ निकली जैसे केवड़े का पानी देखकर सबको सेवादारों की बात বিং্বাম छिड़का हो। यह মন पर ভ্র3া तब उनका भय समाप्त हुआ | Isotloknshrom.org Sallokashramooz @Salokashram करिश्मा  जो उस अण्डारे में हुआ वह जीमनवार ललंगर) तीन दिन तक चला था। दिन र्में प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो बार भोजन खाता था। कुछ तो तीन-्चार बार भी खाते थे क्यौकि प्रत्येक भोजन के पश्चात् दक्षिणा ्में एक मौहर (१0 ग्राम सोना) और एक दौहर (कीमती सूती शाल) दिया जा रहा   या। इस लालच सब दिन में दो-तीन बार भोजन खा रहे ये॰ परंतु ಹRRaT शौच एक बार भी नहीं जा रहे थे, न पेशाब कर रहेये। इतना स्वादिष्ट भोजन या कि पेट भर्भरकर खा रहे ये। पहले से  द्रुगना  भोजन खा रहे थे। हजम भी हो रहा था। किसी रोगी तथा वृद्ध T को कोई परेशानी नहीं हो रही थी। उन सबको मध्य के दिन चिंता हुई कि न तो पेट भारी है, भूख भी ठीक लग रही है, कहीं रोगी काशी न हो जाऐं। सतलोक से आए सेवकों को समस्या बताई तो उन्होने कहा कि यह भोजन ऐसी जड़ी बूटियां डलकर बनाया है जिनसे यह oSI शरीर में ही समा जाएगा हम तो प्रतिदिन यही भोजन अपने लंगर में बनाते हैं॰ यही खाते हैं। हम कभी शौच नहीं जाते तथा न पेशाब करते, आप निश्च्ित रहो। फिर भी विचार कर रहे थे कि खाना खाया है॰ परंतु कुछ तो मल निकलना चाहिए। उनको  लैट्रिन जाने का दबाव हुआ| सब शहर से बाहर चल पडे़े। टट्टी  3/! एकान्त स्थान खोजकर बैठे तो गुदा से वायु निकली। पेट लिए ক हल्का हो गया तथा वायु से सुगंघ निकली जैसे केवड़े का पानी देखकर सबको सेवादारों की बात বিং্বাম छिड़का हो। यह মন पर ভ্র3া तब उनका भय समाप्त हुआ | Isotloknshrom.org Sallokashramooz @Salokashram - ShareChat