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#motivation #kavita #💓 मोहब्बत दिल से
motivation - राह रोकने से रचना 5 मंज़िल नहीं बदलती गुलाब चन्द शर्मा रचनाकार क्यों जलते हो किसी की ताजपोशी से, किसी की राह का काँटा बनकर किसी की किस्मत बदल सकते हो क्या ? क्यों पिघलते हो किसी की चापलूसी से? जिस राह पर चलना ही कठिन हो, किसी की राह का रोडा बनकर, किसी की मंज़िल बदल सकते हो क्या? बिन थके उस राह पर चल सकते हो क्या ?  धूप में अपने पाँव जलाए हों , নিমন নপনী भाग्य नहीं , बोलता है, gouTa : हर संघर्ष नया इतिहास खोलता है। जिसने आँसू पीकर अपने सपने सजाए हों , जिसने हर ठोकर को सफलता की सीढ़ी माना हो, जिसके इरादे पर्वत से भी ऊँचे हों, उसके हौसलों को ईर्ष्या से तोड़ सकते हो क्या ? उन इरादों को झकझोर सकते हो क्या? राह में पत्थर बिछा देने से, दीप बुझाकर रात क्षणभर बढा सकते हो, पर सूरज की किरणें रोक सकते हो क्या ? अपने कदम कभी आगे नहीं बढ़ते। जो औरों को गिराने में लगे रहते हैं, भरसक प्रयत्न कर अँधियारा फैला सकते हो, नए सवेरे को टाल सकते हो क्या ? वे स्वयं जीवन में आगे नहीं बढ़ते।  आओ, काँटे नहीं , ईर्ष्या की आग स्वयं को ही जलाती है, फूल बनें , एक-दूजे के लिए रुकावट नहीं , अनुकूल बनें । प्रेम की ज्योति सदा जग को सजाती है। जिसकी उपस्थिति ही चैहरों पर किसी का गला घोंटकर चैन भले पा जाओ, मुस्कान बिखेर दे, अपनी आत्मा को समझा सकते हो क्या ? उससे बड़ा कोई पुण्य कमा सकते हा क्या ? ப रखा- मत रोक किसी की उड़ान को, राह रोकने से मंज़िल नहीं बदलती , मत बाँध किसी के अरमानों को। ईर्ष्या करने से तकदीर नहीं बदलती | जो दूसरों की राहें रोशन करता है, जो स्वयं को बदलने का साहस कर ले, दुनिया की कोई शक्ति उसकी तस्वीर नहीं बदलती| वही जीवन में सच्चा सम्मान पाता है। काँटा बनोगे तो चुभोगे , फूल बनोगे तो महक बनोगे। नहीं , प्रेरणा बनो यही सच्ची सफलता का पथ है। रुकावट राह रोकने से रचना 5 मंज़िल नहीं बदलती गुलाब चन्द शर्मा रचनाकार क्यों जलते हो किसी की ताजपोशी से, किसी की राह का काँटा बनकर किसी की किस्मत बदल सकते हो क्या ? क्यों पिघलते हो किसी की चापलूसी से? जिस राह पर चलना ही कठिन हो, किसी की राह का रोडा बनकर, किसी की मंज़िल बदल सकते हो क्या? बिन थके उस राह पर चल सकते हो क्या ?  धूप में अपने पाँव जलाए हों , নিমন নপনী भाग्य नहीं , बोलता है, gouTa : हर संघर्ष नया इतिहास खोलता है। जिसने आँसू पीकर अपने सपने सजाए हों , जिसने हर ठोकर को सफलता की सीढ़ी माना हो, जिसके इरादे पर्वत से भी ऊँचे हों, उसके हौसलों को ईर्ष्या से तोड़ सकते हो क्या ? उन इरादों को झकझोर सकते हो क्या? राह में पत्थर बिछा देने से, दीप बुझाकर रात क्षणभर बढा सकते हो, पर सूरज की किरणें रोक सकते हो क्या ? अपने कदम कभी आगे नहीं बढ़ते। जो औरों को गिराने में लगे रहते हैं, भरसक प्रयत्न कर अँधियारा फैला सकते हो, नए सवेरे को टाल सकते हो क्या ? वे स्वयं जीवन में आगे नहीं बढ़ते।  आओ, काँटे नहीं , ईर्ष्या की आग स्वयं को ही जलाती है, फूल बनें , एक-दूजे के लिए रुकावट नहीं , अनुकूल बनें । प्रेम की ज्योति सदा जग को सजाती है। जिसकी उपस्थिति ही चैहरों पर किसी का गला घोंटकर चैन भले पा जाओ, मुस्कान बिखेर दे, अपनी आत्मा को समझा सकते हो क्या ? उससे बड़ा कोई पुण्य कमा सकते हा क्या ? ப रखा- मत रोक किसी की उड़ान को, राह रोकने से मंज़िल नहीं बदलती , मत बाँध किसी के अरमानों को। ईर्ष्या करने से तकदीर नहीं बदलती | जो दूसरों की राहें रोशन करता है, जो स्वयं को बदलने का साहस कर ले, दुनिया की कोई शक्ति उसकी तस्वीर नहीं बदलती| वही जीवन में सच्चा सम्मान पाता है। काँटा बनोगे तो चुभोगे , फूल बनोगे तो महक बनोगे। नहीं , प्रेरणा बनो यही सच्ची सफलता का पथ है। रुकावट - ShareChat