ShareChat
click to see wallet page
search
#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - एक वक्त था एक वक्त था जब कोई अपने बच्चों की शादी करता था तब परिवार के रूठे हुए भाइयों को मनाता था। उनके पैर पकड़ता था। कई बार चचा , ताऊ, भाई के आगे नाक भी रगड़ना पड़ता बिरादरी था। क्योंकि उस समय पूरी को साथ लेकर चलने का रिवाज था। लोग रिश्ता करने से पहले ये देखते थे कि परिवार साथ है या नही| मगर आज वक्त बदल गया है आज चाचा , ताऊ तो बात है लोग भाई को दूर की भी नही मनाते। इतना ही नही माँ बुलाये बिना भी अपने बच्चों बाप को की शादी कर देते हैं घोर आर्थिक युग चल रहा है। सब कुछ पैसे के दम पर हाे रहा है। पैसा सब खरीद है। इमान भी और इंसान भी सकता सच है ना ? एक वक्त था एक वक्त था जब कोई अपने बच्चों की शादी करता था तब परिवार के रूठे हुए भाइयों को मनाता था। उनके पैर पकड़ता था। कई बार चचा , ताऊ, भाई के आगे नाक भी रगड़ना पड़ता बिरादरी था। क्योंकि उस समय पूरी को साथ लेकर चलने का रिवाज था। लोग रिश्ता करने से पहले ये देखते थे कि परिवार साथ है या नही| मगर आज वक्त बदल गया है आज चाचा , ताऊ तो बात है लोग भाई को दूर की भी नही मनाते। इतना ही नही माँ बुलाये बिना भी अपने बच्चों बाप को की शादी कर देते हैं घोर आर्थिक युग चल रहा है। सब कुछ पैसे के दम पर हाे रहा है। पैसा सब खरीद है। इमान भी और इंसान भी सकता सच है ना ? - ShareChat