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"वृषभ चढ़ी माता भली, डमरू त्रिशूल हाथ" व्याख्या: इस पंक्ति का अर्थ है कि कल्याण करने वाली माता महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है, जिस पर वे सवार हैं। उनके हाथों में डमरू और त्रिशूल सुशोभित हैं। डमरू सृष्टि की ध्वनि और त्रिशूल बुराइयों का संहार करने तथा तीनों तापों (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक) को नष्ट करने का प्रतीक है। "भक्तों के संकट हरें, सदा नवाऊँ माथ" व्याख्या: माँ महागौरी अत्यंत करुणामयी हैं और अपने शरण में आने वाले भक्तों के सभी दुखों, कष्टों और संकटों को दूर कर देती हैं। इसलिए, मैं माँ के चरणों में श्रद्धापूर्वक सदा अपना माथ (सिर) झुकाती हूँ और उन्हें प्रणाम करती हूँ।🙏🏻 #जय माता दी #🌺 जय माता दी 🌺 #🌺 जय माता रानी 🌺 #जय माता रानी #जय माता रानी 🙏
जय माता दी - @೮ 0@00 त्रिशूल 7 वृषभ चढ़ी माता भली, डमरू हाथ भक्तों के संकट हरें, सदा नवाऊँ माथ महागौरी जय माँ @೮ 0@00 त्रिशूल 7 वृषभ चढ़ी माता भली, डमरू हाथ भक्तों के संकट हरें, सदा नवाऊँ माथ महागौरी जय माँ - ShareChat