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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - तू दूर हुई जब से मैंने साँस लेना छोड़ दिया है, दिल तो धड़कता है मगर जीना छोड़ दिया है। तेरी यादों ने मेरी रात को वीरान किया, मैंने ख़्वाबों का नगर फिर से बसाना छोड़ दिया है। तेरे जाने का असर पूछ न मेरे हमदम, मैंने महफ़िल में भी खुलकर मुस्कुराना छोड़ दिया है। जो तेरे नाम से महकती थीं कभी साँसें मेरी, हवाओं से भी रिश्ता निभाना छोड़ दिया है। 37 दिल के दरिया में उठे दर्द के तूफ़ान इतने , मैंने अश्कों को भी आँखों से बहाना छोड़ दिया है। कोई उम्मीद , कोई चाह, कोई मंज़िल न रही, मैंने किस्मत से भी शिकवा जताना छोड़ दिया है। तेरी राहों में बिछे फूल समेटे हैं अब तक, मैंने यादों का तिरा साथ भुलाना छोड़ दिया है। में सुनता  हूँ सदाएँ तेरी, अब भी तन्हाई मैंने ख़ामोशियों को दोस्त बनाना छोड़ दिया है। प्रकाश पंडित' ये मोहब्बत का असर है शायद , उसके जाने के बाद ख़ुद को मनाना छोड़ दिया है। तू दूर हुई जब से मैंने साँस लेना छोड़ दिया है, दिल तो धड़कता है मगर जीना छोड़ दिया है। तेरी यादों ने मेरी रात को वीरान किया, मैंने ख़्वाबों का नगर फिर से बसाना छोड़ दिया है। तेरे जाने का असर पूछ न मेरे हमदम, मैंने महफ़िल में भी खुलकर मुस्कुराना छोड़ दिया है। जो तेरे नाम से महकती थीं कभी साँसें मेरी, हवाओं से भी रिश्ता निभाना छोड़ दिया है। 37 दिल के दरिया में उठे दर्द के तूफ़ान इतने , मैंने अश्कों को भी आँखों से बहाना छोड़ दिया है। कोई उम्मीद , कोई चाह, कोई मंज़िल न रही, मैंने किस्मत से भी शिकवा जताना छोड़ दिया है। तेरी राहों में बिछे फूल समेटे हैं अब तक, मैंने यादों का तिरा साथ भुलाना छोड़ दिया है। में सुनता  हूँ सदाएँ तेरी, अब भी तन्हाई मैंने ख़ामोशियों को दोस्त बनाना छोड़ दिया है। प्रकाश पंडित' ये मोहब्बत का असर है शायद , उसके जाने के बाद ख़ुद को मनाना छोड़ दिया है। - ShareChat