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अक्षरदूत #माझ्या लेखणीतून #💭माझे विचार
माझ्या लेखणीतून - हाय, क्या शायरी है हमने वक़्त को बदलते देखा है, और अपनों को भी पराया होते देखा है॰. जो कहते थे "हम साथ हैं हमेशा" , उन्हीं को बीच रास्ते मुड़ते देखा है..!! सुनिल जी गवई हाय, क्या शायरी है हमने वक़्त को बदलते देखा है, और अपनों को भी पराया होते देखा है॰. जो कहते थे "हम साथ हैं हमेशा" , उन्हीं को बीच रास्ते मुड़ते देखा है..!! सुनिल जी गवई - ShareChat