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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #💓सोमवार शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - एक रिश्ते में टिकते क्यूँ नहीं हो इतने सस्ते हो, फिर बिकते क्यूँ नहीं हो प्यार अदब तहज़ीब, सलीका, ये ढोंग क्यूँ जैसे हो वैसे दिखते क्यूँ नहीं हो एक रिश्ते में टिकते क्यूँ नहीं हो इतने सस्ते हो, फिर बिकते क्यूँ नहीं हो प्यार अदब तहज़ीब, सलीका, ये ढोंग क्यूँ जैसे हो वैसे दिखते क्यूँ नहीं हो - ShareChat