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डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ीभूल #WednesdayMotivation #santrampal mahraj ji
santrampal mahraj ji - विष्णु 7 श्री ब्रह्मा, श्री तथा श्री शंकरजी की उत्पत्ति 9@ साथ जवरदरती शादी काल पुरूप (क्षर पुरूप) ने प्रकति क 'fu] की तथा नीन पुत्रों (रजगुण युक्त ஈ7 சி, =J 3 ச = शिव शकर जी) की उत्पत्ति की। जवान होने तक तीनों पुरत्रों को तमगुण युव्त दुर्गा के द्वारा  देैता हः फिर युया होने परश्री बह्या जी को  সঘন करचा फमल फ चिष्णु  फल पर॰ शी॰ णी को शेप नाग रकी रय्या पर तथा भी शियनी को कलाश प्रकति (दुगा 5 గా पर्वत पर सनेत ককে রণভব কযননা ২ नत्पम्चात Frale | दिया जाना ह। काल बह्ा क आदेश सेप्रकति देवीने तीनों एक फर बह्याण्ड गेतीन लोको (स्यर्गलोक पाताल जोकीनेएक॰एक பa=14+41 नियुक्त  चिगाग के गत्री (प्रगु कर दैत्ता ह। जसे शी चह्या जी को रजोगु्णा चिभाग  fau]; जी कौ सत्तोगुण चिभाग का तथा ओी शिव शकर जी को तमोगुण  4 =41 महाविष्णु  নিমাবা করা স] ঘনাযা নথা ব্রাল মচা বরয যুদ [দচবনা गहाशिव  नुख्य नत्री पट को सगालता ह। रूप स 7 F" ೯ 1fa ಸ Rr प्माण महापुराण ' विरावरवर सहिता पा्ठ 2l२h जिस নিu]  तथा   नहरवरसे থচII  ٥  ठान्य सदाशिव हतिथा रूद सहिता अच्याय IW) 71 దT 7 ! 0 = 105 =41 110 शी रनुगान प्रसाद पौद्दार  गीता प्रस गोरखपुर रो प्रकाशित  ಹrl m7 3ule ಗಖl श्रीगददैवीमहापुराण तीसरा स्कद अध्याय  পণিনন 71 < 13 , I7 / ric' औी हनुमान प्रसाद पौद्दार चिमन  गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित अनुवादक लाल Tmar) SANT RAMPAL JI SPIRIIUAL LEALER @SAINTRAMPALIMI SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL J MAHARN विष्णु 7 श्री ब्रह्मा, श्री तथा श्री शंकरजी की उत्पत्ति 9@ साथ जवरदरती शादी काल पुरूप (क्षर पुरूप) ने प्रकति क 'fu] की तथा नीन पुत्रों (रजगुण युक्त ஈ7 சி, =J 3 ச = शिव शकर जी) की उत्पत्ति की। जवान होने तक तीनों पुरत्रों को तमगुण युव्त दुर्गा के द्वारा  देैता हः फिर युया होने परश्री बह्या जी को  সঘন करचा फमल फ चिष्णु  फल पर॰ शी॰ णी को शेप नाग रकी रय्या पर तथा भी शियनी को कलाश प्रकति (दुगा 5 గా पर्वत पर सनेत ককে রণভব কযননা ২ नत्पम्चात Frale | दिया जाना ह। काल बह्ा क आदेश सेप्रकति देवीने तीनों एक फर बह्याण्ड गेतीन लोको (स्यर्गलोक पाताल जोकीनेएक॰एक பa=14+41 नियुक्त  चिगाग के गत्री (प्रगु कर दैत्ता ह। जसे शी चह्या जी को रजोगु्णा चिभाग  fau]; जी कौ सत्तोगुण चिभाग का तथा ओी शिव शकर जी को तमोगुण  4 =41 महाविष्णु  নিমাবা করা স] ঘনাযা নথা ব্রাল মচা বরয যুদ [দচবনা गहाशिव  नुख्य नत्री पट को सगालता ह। रूप स 7 F" ೯ 1fa ಸ Rr प्माण महापुराण ' विरावरवर सहिता पा्ठ 2l२h जिस নিu]  तथा   नहरवरसे থচII  ٥  ठान्य सदाशिव हतिथा रूद सहिता अच्याय IW) 71 దT 7 ! 0 = 105 =41 110 शी रनुगान प्रसाद पौद्दार  गीता प्रस गोरखपुर रो प्रकाशित  ಹrl m7 3ule ಗಖl श्रीगददैवीमहापुराण तीसरा स्कद अध्याय  পণিনন 71 < 13 , I7 / ric' औी हनुमान प्रसाद पौद्दार चिमन  गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित अनुवादक लाल Tmar) SANT RAMPAL JI SPIRIIUAL LEALER @SAINTRAMPALIMI SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL J MAHARN - ShareChat