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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
✍मेरे पसंदीदा लेखक - जब साँसें साथ छोड रही थीं॰ तब 1 उसकी बाँहें नहीं छूटीं. डर था, पानी था, मौत सामने थी, 1 पर उसकी पकड़ में सिर्फ एक ही दुनिया थो उसका बच्चा | वो खुद को बचा सकती थी, को चुना... पर उसने अपने बच्चे ऐसी ममता को शत-शत नमन। जब साँसें साथ छोड रही थीं॰ तब 1 उसकी बाँहें नहीं छूटीं. डर था, पानी था, मौत सामने थी, 1 पर उसकी पकड़ में सिर्फ एक ही दुनिया थो उसका बच्चा | वो खुद को बचा सकती थी, को चुना... पर उसने अपने बच्चे ऐसी ममता को शत-शत नमन। - ShareChat