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#गुलज़ार साहब की शायरी #गुलज़ार साहब📝
गुलज़ार साहब की शायरी - ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर सैली सी ख़ामोशी में सुनी 3q] फ़रमाइश पर. +0 9' 0 0 Hs मुँह और देखा कितनी दूर खड़े थे हम दोनों आप लडे थे हम से बस इक कखट की गुंजाइश पर...!! 6 owouh #गुलज़ार   साहब ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर सैली सी ख़ामोशी में सुनी 3q] फ़रमाइश पर. +0 9' 0 0 Hs मुँह और देखा कितनी दूर खड़े थे हम दोनों आप लडे थे हम से बस इक कखट की गुंजाइश पर...!! 6 owouh #गुलज़ार   साहब - ShareChat