ShareChat
click to see wallet page
search
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर मैं उन पवनपुत्र हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ॰ जो दुष्टों (रूपी) भस्म करने के लिए अग्नि के समान हैं और जो ज्ञान की वन को (घनीभूत साक्षात मूर्ति ज्ञान) हैं; जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष किए हुए श्री रामचंद्र जी निवास करते हैं। और बाण धारण हरि शरणं प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर मैं उन पवनपुत्र हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ॰ जो दुष्टों (रूपी) भस्म करने के लिए अग्नि के समान हैं और जो ज्ञान की वन को (घनीभूत साक्षात मूर्ति ज्ञान) हैं; जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष किए हुए श्री रामचंद्र जी निवास करते हैं। और बाण धारण - ShareChat