#GodMorningSaturday
#शराब_पीना_महापाप
, जाग मच्छदंर, गोरख आया।
मुछंदर नाथ जी की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चली थी तो उनके मन में प्रेरणा हुयी जीवन तो बीत गया पर मैने गृहस्थ जीवन का आनंद नही लिया है तभी सिंहल द्वीप के राजा की मृत्यु हुयी मुछन्दर नाथ ने अपना शरीर एक गुफा में सुरक्षित रख अपनी आत्मा को राजा के शरीर में प्रवेश कर दी तो राजा के शरीर में जान आ गयी । अब मुछंदर नाथ राज करने लगा और राजशाही के आनन्द ले रहा था तभी राजदरबार के विद्वानो ने रानी को कहा यह हमारा राजा नही है ना पहले सा व्यवहार और लक्षण है यह तो मुछंदर नाथ योगी है जिसने फलानी गुफा मे शरीर छोड यहां राज के आनंद लेने आया है ।
रानी बोली कोई बात नही । राजा रहेगा तो राज चलता रहेगा । मुछन्दर का शरीर खोजकर फुंकवा दिया गया । उधर योगी गौरखनाथ किसी और तपस्वी से ज्ञान चर्चा कर रहे थे तो वो योगी बोला अरे गौरख तू इतना ही योगी है तो अपने गुरू को सिंहल द्वीप के राजा के शरीर से छुडवा ले ना । गौरखनाथ को यह बात लगी और वह सिंहल द्वीप पहुंचा रानी को विद्वानो ने बताया इस मुछन्दर नाथ का एक शिष्य गौरख बडा तेज है वो अपने गुरू छुडवाने आयेगा तो रानी ने बहुत पहले से ही योगी तपस्वियो का राज मे आना वर्जित कर रखा था ।
उधर मुछंदर नाथ के दो पुत्र हो गये उने से एक का जन्म दिन मनाया जा रहा था । म्यूजिक पार्टी बाहर देश से बुलायी गयी गौरखनाथ को राज्य में घुसने का बहाना मिल गया उसने तबले बजवाने वाले को सिद्धी से दस्त लगवा दिये अब पुरी म्युजिक पार्टी सकते मे आ गयी ऐसे कैसे कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे तभी गोरखनाथ ने पुछा क्या बात है उन्होने अपनी व्यथा बताई गौरखनाथ ने बोला में बढिया तबला बजा सकता हुं देख लो उसकी ट्राईल हुई बात बन गयी अब राज दरबार में गाना गाते गाते गोरख नाथ बोलते जाग मुछंदर गोरख आयो , जाग मुछंदर गोरख आयो ।
मुछन्दर की आत्मा अंदर से फडक उठती यह क्या हो रहा है राजा ने उसे राज महल मे अपने बच्चो की देख भाल के लिये रख लिया गोरखनाथ बोलता गुरू जी आप कहां फंस गये राजा बना बना मुछन्दर बोलता अरे तू अपनी रहने ने देख जी सा आ रहा है। तू अपनी डयूटी कर बच्चो का ख्याल रख । तब गौरखनाथ ने बच्चो को सिद्धी से दस्त लगा दिये हर पांच पांच मिनिट मे एक के बाद एक जाने लगा मुछंदर बोला बाहर जा के झडका लिया गौरख ने उन दोनो के बाल पकड झडक दिया तो अंदर से सारा शरीर निकल गया और सिर्फ खाल खाल राजा के पास ले गया तो राजा बोला यह तूने क्या किया तो गौरखनाथ बोला गुरू मुछंदर नाथ शिव के साधक होकर जीवन भर बह्मचर्य का पालन कर अपना योग यहां क्यूं नष्ट कर रहा है। चल वापस। मुछन्दर बोला कैसे आऊ वो शरीर तो इस रानी ने फूंकवा दिया गौरख बोला चलो देखते है । मुछन्दर बोला ठीक यह थैला साथ ले लेना।
वहां से मुछन्दर को निकाला और जहां उसकी अस्थि और राख पडी उसका अपनी सिद्धी से शरीर बना मुछन्दर को वापस खडा कर दिया मुछन्दर ने कहा वो थैला कहां है थैला लेकर वो वापस चल पडे रास्ते में उन्हे प्यास लगी एक कुऐं से पानी पीते समय गोरखनाथ ने थैले से कुछ निकाल कुयें में फेंक दिया । थोडा आगे चले की मुछंदर नाथ को लगा थैला कुछ हल्का सा लग रहा है उसने देखा उसमें जो मैने दो सोने की ईंट रखी वो गायब है।
वो गौरख पर विफर गया बोला कहां छुपाई तुने ईंट गौरख बोला कुंऐ में फेंक दी मुछंदर इतना गुस्से में हो गया की उसको राह चलते चलते पीटता जा रहा था गौरखनाथ ने कहा गुरू मुछन्दर नाथ जी जब आप को भोग ही चाहिये था तो योगी क्यों बने 60 वर्ष तक आपने गौरख जैसे कितने ही शिष्य बना योग दिया और आज आप दो ईंट में जी फंसा रहे हो और उसने अपनी सिद्धी से एक पहाडी पर मंत्र फूंका और सारी पहाडी सोने की बना दी और कहा उठा लो जितना चाहिये तब मुछंदर नाथ को अपने योग और भूल का पुन: एहसास हुआ ।
अब गौरख नाथ जी शिव के उपासक थे शिव आठ सिद्धी के दाता है उसमें से एक गौरखनाथ को दे दी जिस से वो सिद्धी युक्त काम कर सकता था । कबीर साहब कहते है हम साधक को 24 सिद्धिया देते है पर संसार में दिखाने नही उस परमधाम को जाने में प्रयोग करते है ।
फिर गौरखनाथ और कबीर साहब की ज्ञान गौष्ठी भी हुयी। कबीर साहब बोले गौरख तू मुर्दे तक जिन्दा कर तू भी मुर्दो में ही है अर्थात जन्म मरण तो तेरा भी है काफी वाद विचार के बाद गौरखनाथ ने कबीर साहब की परिक्षा लेनी चाहिये फिर कबीर साहब से उपदेश लिया कबीर साहब बोले आपको शिव की साधना छुडा नही रहे है बल्की इसमें और जोड रहे है फिर गौरखनाथ ने कबीर साहब की बताई सत भक्ति की ।
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