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#😴शुभ रात्री😴 #✍गुलजारांचे साहित्य #✍🏽 माझ्या लेखणीतून
😴शुभ रात्री😴 - बात न होे, तुमसे तो भी दिन गुजर जाता है. पर हर दिन में , एक पल ऐसा आता है. जहाँ सब कुछ ठीक होते हुए भी, मन खाली सा रह जाता है. 37<3<47, सबसे ज़्यादा तुम याद आते हो. बस वही पल है, जहाँ तुम नहीं होते. सबसनम्हायीद कमी ज़्यादा महसूस होती है. बात न होे, तुमसे तो भी दिन गुजर जाता है. पर हर दिन में , एक पल ऐसा आता है. जहाँ सब कुछ ठीक होते हुए भी, मन खाली सा रह जाता है. 37<3<47, सबसे ज़्यादा तुम याद आते हो. बस वही पल है, जहाँ तुम नहीं होते. सबसनम्हायीद कमी ज़्यादा महसूस होती है. - ShareChat