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धर्म के आगोश में हर इक इंसान है, https://www.myntra.com/studio/studiopost/14862693?utm_source=social_share_ugc_post&utm_medium=deeplink&utm_campaign=social_share_ugc_post_deeplink #🌙रात की शायरी✍
🌙रात की शायरी✍ - धर्म के आगो़श में हर इक इंसान Editing 09/06/26 /9:40 धर्म के आगोश में हर इक इंसान है, जिन्हें लोग कल तक गरीबों का मसीहा कहते थे, उन्हें भी कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने किसी एक मजहब का बता दिया। हम सबको.. नाम, मजहब और जात में बाँट दिया गया, वरना. इंसानियत की कोई जात नहीं होती, हम सब तो बस इंसान ही हैं धर्म के आगो़श में हर इक इंसान Editing 09/06/26 /9:40 धर्म के आगोश में हर इक इंसान है, जिन्हें लोग कल तक गरीबों का मसीहा कहते थे, उन्हें भी कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोगों ने किसी एक मजहब का बता दिया। हम सबको.. नाम, मजहब और जात में बाँट दिया गया, वरना. इंसानियत की कोई जात नहीं होती, हम सब तो बस इंसान ही हैं - ShareChat